नई दिल्ली, नवंबर 28। क्रिप्टोकरेंसी निवेश का एक बड़ा और अहम ऑप्शन बनता जा रहा है। भारत सहित दुनिया भर में लोग तरह तरह की नयी नयी क्रिप्टो में जम कर पैसा लगा रहे हैं। वहीं जिन लोगों ने अब से कुछ साल पहले क्रिप्टो में पैसा लगाया था, वे मालामाल बन चुके हैं। जी हां जिन लोगों ने बिटकॉइन में अब से 9 साल पहले निवेश किया होगा, वे अब मालामाल बन चुके हैं। इन्हीं में से एक व्हेल अकाउंट का पता चला है। आगे जानिए कि व्हेल अकाउंट क्या होता है और जिस व्हेल अकाउंट की हम बात कर रहे हैं, उसकी निवेश राशि कितनी बन चुकी है।
9 साल में अरबपति
हाल ही में एक ऐसे बिटकॉइन खाते का पता चला जो 12 सालों तक निष्क्रिय रहा और इस दौरान केवल नाममात्र लेन-देन ही की। आपको बता दें कि इस खाते में 616 बिटकॉइन हैं, जिनकी वैल्यू आज के हिसाब से करीब करीब 3 करोड़ डॉलर यानी लगभग 216 करोड़ रुपये है। जिस किसी का भी यह खाता है, उसने इन कॉइंस को एक अलग वॉलेट में ट्रांसफर कर दिया है।
9 साल पहले बिटकॉइन की कीमत
इन कॉइन्स को 10 दिसंबर 2012 को खरीदा गया था। तब 616 सिक्कों की कीमत प्रति कॉइन 13.30 डॉलर या लगभग 978 रुपये थी, जिसका अर्थ है कि उस समय कुल लेनदेन का मूल्य 8,195 डॉलर या लगभग 6 लाख रुपये रहा होगा। बीते 9 सालों में बिटकॉइन की जोरदार वृद्धि ने इस निष्क्रिय वॉलेट को व्हेल बना दिया है। यह लंबी अवधि में मुनाफे की शानदार मिसाल है।
समय के साथ दिलचस्पी बढ़ी
2012 में बिटकॉइन एक बहुत ही नया आइडिया था। अहम बात यह है कि बहुत से लोग इसे नहीं जानते थे या इस पर भरोसा नहीं करते थे। धीरे-धीरे, इसमें ग्रोथ होती गयी। ऐसा इसलिए हो पाया क्योंकि अधिक लोगों को इसके बारे में पता चला और वे इसमें पैसा लगाने लगे। इसी तरह अधिक लोग इंडस्ट्री में शामिल हो गए। जिन लोगों ने बिटकॉइन के शुरुआती दिनों में ही इस पर दांव लगाया वे आज अरबपति बन चुके हैं।
क्या होता है व्हेल अकाउंट
अब जानिए कि एक व्हेल अकाउंट क्या होता है। एक व्हेल अकाउंट ऐसा खाता होता है जिसके पास बड़ी संख्या में क्रिप्टो सिक्के होते हैं और इससे भी बड़ी बात यह होती है कि यह अकाउंट क्रिप्टोकरेंसी मार्केट में उतार-चढ़ाव लाने की शक्ति रखता है। क्रिप्टो बाजार की चाल को समझने के लिए उनके द्वारा किए गए प्रत्येक लेनदेन पर बारीकी से नजर रखी जाती है। 2017 में, लगभग 1,000 लोगों के पास सभी बिटकॉइन का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा था।
ऐसे कम-ज्यादा होती हैं कीमतें
किसी क्रिप्टोकरेंसी का कितना इस्तेमाल होता है ये फैक्टर उस क्रिप्टो की कीमतों में उतार-चढ़ाव के लिए जिम्मेदार होती हैं। किसी क्रिप्टोकरेंसी की माइनिंग लिमिटेड होती है। यानी कितने सिक्के चलन में रहेंगे ये पहले से तय होता है। जैसे कि बिटकॉइन की डेवलपिंग के समय तय हुआ था कि इसके 2.1 करोड़ कॉइन ही जनरेट होंगे। अब कोई इसके कॉइन अधिक मात्रा में होल्ड कर ले तो दुर्लभता बढ़ने से इसकी कीमत बढ़ेगी। इसी तरह व्हेल खाते वो होते हैं, जो किसी क्रिप्टो के जितने कॉइन सर्कुलेशन में होते हैं उनमें से एक बड़े हिस्से को अपने पास रखते हैं। यानी इनके पास किसी खास की कॉइन की बड़ी होल्डिंग होती है।
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