नई दिल्ली, जुलाई 26। देश में तरह तरह के प्रयोग हो रहे हैं। ऐसा ही एक प्रयोग मुर्गों के अपशिष्ट से बायोडीजल बनाने का हो रहा था। इसमें दुनिया में पहली बार भारत में सफल प्रयोग हो गया है। इस प्रयोग की सफलता के बाद भारत सरकार की तरफ से इस आविष्कार को पेटेंट भी दे दिया गया है। देश के वेटेरिनरी डाक्टर ने यह उपलबधि पाई है। इन डाक्टर का नाम जॉन अब्राहम। केरल के इस डाक्टर ने अपने पेटेंट के लिए करीब 7 साल तक इंतजार किया है। आइये जानते हैं कि क्या है उनका प्रयोग और कैसे चलेगा इससे वाहन।
मुर्गों के अपशिष्ट से
डाक्टर जॉन अब्राहम के दिमाग में एक आडडिया आया कि अगर सब चीजों से बायोडीजल बन सकता है, तो मुर्गे के अपशिष्ट से क्यों नहीं। इसके बाद इन्होंने इसको लेकर प्रयोग शुरू किए। बाद में उकनो इस प्रयोग में सफलता भी मिल गई। इसके बाद उन्होंने इसके पेटेंट के लिए आवदेन किया, जो उनको करीब 7 साल बाद 7 जुलाई 2021 को मिल गया है।
अच्छा ऐवरेज दे रहा है वाहन
केरल पशु चिकित्सक जॉन अब्राहम के अनुसार मुर्गे से बने बायोडीजल ईंधन के एक लीटर से वाहन करीब 38 किलोमीटर से ज्यादा का औसत दे रहा है। वहीं इसकी कीमत डीजल के मौजूदा कीमत से करीब 40 फीसदी कम है। इसके अलावा यह प्रदूषण के मामले में भी असरदार है। केरल वेटेरिनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी के तहत आने वाले वेटेरिनरी कॉलेज के एसोसियेट प्रोफेसर जॉन अब्राहम के अनुसार उनको भारत के पेटेंट आफिस से 7 जुलाई, 2021 को पेटेंट हासिल हो गया है।
जानिए कैसे हुआ यह आविष्कार
पशु चिकित्सक जॉन अब्राहम के अनुसार मुर्गों को काटने के बाद जो अपशिष्ट बचता है, उससे बहुत ही अच्छी गुणवत्ता का बायो डीजल बनाया जा सकता है। उनके अनुसार 2009-12 के दौरान उन्होंने यह प्रयोग किए थे। उनके दिवंगत प्रोफेसर रमेश श्रवण कुमार के मार्गदर्शन में अपना यह शोध पूरा किया था। इसी शोध के बाद पशु चिकित्सक जॉन अब्राहम ने वायनाड के कलपेट्टा के पास स्थित पोकोडे वेटेरिनरी कॉलेज में 2014 में एक प्रयोगत्माक संयंत्र की स्थापना की। इसके लिए उनको भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से वित्तीय मदद भी मिली। बाद में उन्होंने यहां पर बनाए गए बायो डीजल के लिए भारत पेट्रोलियम की कोच्चि स्थित रिफाइनरी से अप्रैल 2015 में गुणवत्ता प्रमाणपत्र भी प्राप्त किया। उनके शोध से बनाए गए इस बायो डीजल से फिलहाल उनके कॉलेज का 1 वाहन चलाया भी जा रहा है।
गुणवत्ता में ज्यादा अच्छा है यह बायो डीजल
पशु चिकित्सक जॉन अब्राहम के अनुसार मुर्गे के अपशिष्ट से तैयार हुआ बायोडीजल गुणवत्ता में ज्यादा अच्छा होता है। जब उनसे यह जानने का प्रयास किया गया कि मुर्गे का ही अपशिष्ट क्यों इस्तेमाल किया, तो उन्होंने बताया कि अब सूअर के अपशिष्ट से बायो डीजल बनाने की परियोजना पर काम किया जा रहा है।
जानिए कैसे तैयार होगा एक लीटर बायो डीजल
पशु चिकित्सक जॉन अब्राहम के अनुसार कसाई घरों से मिलने वाले मुर्गे के 100 किलोग्राम अपशिष्ट से 1 लीटर बायो डीजल को तैयार किया जा सकता है। उनके अनुसार मुर्गे के अपशिष्ट में करीब 62 फ़ीसदी फैट होता है, उससे एनर्जी कंटेंट का मुख्य अवयव सिटेन 72 के लेवल का रहता है। वहीं यह नॉर्मल डीजल में यह सिर्फ 64 के लेवल पर होता है। इस कारण मुर्गे के अपशिष्ट से बनने वाले बायोडीजल से वाहन के इंजन की क्षमत 11 फीसदी बढ़ जाती है और धुआं भी 47 प्रतिशत तक कम निकलाता है।
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