बड़ी राहत : बच्चों को हर महीने मिलेंगे 5000 रु, जानिए कहां

नई दिल्ली, मई 15। इस समय पूरे देश में कोरोना चरम पर है। रोज हजारों लोग कोरोना से जान गंवा रहे हैं। स्थिति यह भी है कि कई बच्चे अपने माता-पिता खो रहे हैं। इससे उन बच्चों की देख-रेख करने वाला कोई नहीं रह गया है। इन बच्चों का भविष्य दांव पर लग गया है। इसी को देखते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक अहम ऐलान किया है, जिससे ऐसे बच्चों का भविष्य काफी हद तक सुरक्षित हो जाएगा। मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान सरकार ऐसे बच्चों के बचाव में आने वाली पहली राज्य सरकार बन गई है जो अनाथ हो गए हैं या उन्होंने कोविड महामारी के कारण अपने माता-पिता / अभिभावकों में से किसी एक को खो दिया है।

मिलेंगे हर महीने 5000 रु

मिलेंगे हर महीने 5000 रु

यह सुनिश्चित करते हुए कि ऐसे सभी बच्चे, जिन्होंने इस महामारी के कारण अपने माता-पिता / अभिभावकों में से किसी को खो दिया है, राज्य की जिम्मेदारी हैं। सीएम ने घोषणा की कि ऐसे सभी बच्चों / परिवारों को मासिक पेंशन के रूप में 5,000 रुपये मिलेंगे। इन बच्चों को हर महीने 5000 रु के अलावा और भी कई सुविधाएं दी जाएंगी।

मिलेगी फ्री शिक्षा और राशन

मिलेगी फ्री शिक्षा और राशन

ऐसे बच्चों / परिवारों को न केवल 5,000 रुपये मासिक पेंशन दी जाएगी, बल्कि राज्य उनकी मुफ्त शिक्षा सुनिश्चित करेगा। यहां तक कि अगर ये बच्चे और उनके परिजन मुफ्त राशन के पात्र नहीं हैं, तो भी उन्हें मुफ्त राशन मिलेगा। इस बात की घोषणा खुद सीएम चौहान ने की है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि जीवित माता-पिता / अभिभावक / परिजनों को उनकी देखभाल करने का काम सौंपा जाएगा। उन्हें बच्चों के सर्वाइवल और देखभाल के लिए बिजनेस शुरू करने के लिए ब्याज मुक्त लोन दिया जाएगा।

बच्चों को मिलेगी सहूलियत

बच्चों को मिलेगी सहूलियत

महत्वपूर्ण बात यह है कि मध्य प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग और मध्य प्रदेश सरकार का महिला एवं बाल विकास विभाग (वर्तमान में मध्य प्रदेश का महिला एवं बाल विकास विभाग मुख्यमंत्री के अधीन है) ऐसे सभी बच्चों का पता लगाने का काम कर रहा है जिनके माता-पिता या अभिभावकों में से कोई एक गुजर गया है। चौहान के अनुसार राज्य आयोग भी सरकार की मौजूदा बाल प्रायोजक योजना के तहत ऐसे प्रत्येक बच्चे को 2,000 रुपये मासिक देने जा रहा है और वे लगातार जाँच करेगा कि जिन परिवारों के साथ ये बच्चे रह रहे हैं, वे वास्तव में उनकी देखभाल कर रहे हैं या नहीं।

प्रॉपर्टी और बैंक में पैसों का ट्रांसफर

प्रॉपर्टी और बैंक में पैसों का ट्रांसफर

इसके अलावा, आयोग ने प्रत्येक जिले में बाल कल्याण समितियों (सीडब्ल्यूसी) से इन बच्चों के अपने माता-पिता की चल और अचल संपत्तियों, जिसमें बैंकों में पैसा भी शामिल है, का आसान ट्रांसफर सुनिश्चित करने के लिए कहा है।

बनाया जाएगा स्पेशल फंड

बनाया जाएगा स्पेशल फंड

इसके अलावा, आयोग ऐसे बच्चों की स्थायी देखभाल करने के लिए एक रिजर्व फंड बनाएगा। इसमें परोपकारी दाता अपना योगदान कर सकेंगे। इस पैसे से इन बच्चों की देखभाल और शिक्षा की व्यवस्था की जाएगी। पिछले कुछ समय में मध्य प्रदेश में कई जगह से ऐसे बच्चों की जानकारी सामने आई है।

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