बड़ी खबर : RBI गवर्नर ने किया रेपो रेट में 40 बेसिट पॉइंट्स की बढ़ोतरी का ऐलान

नई द‍िल्‍ली, मई 4। आज आरबीआई गर्वनर शक्तिकांत दास ने अचानक दिए एक बयान में रेपो रेट में 40 आधार अंकों (0.40 फीसदी) की बढ़ोतरी का ऐलान किया। आरबीआई ने पिछले महीने अपनी मौद्रिक नीति की बैठक में नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया था। मगर अब आरबीआई गवर्नर ने बताया कि मौद्रिक नीति समिति ने 2 मई से 4 मई तक एक अनिर्धारित बैठक की और रेपो दरों में 40 आधार अंकों की वृद्धि के लिए मतदान किया। अगस्त, 2018 के बाद पहली बार आरबीआई रेपो रेट में बढ़ोतरी की गयी है।

क्यों की गयी बढ़ोतरी

क्यों की गयी बढ़ोतरी

दास के अनुसार मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए आरबीआई ने एक अनिर्धारित नीति समीक्षा में बेंचमार्क ब्याज दर 40 बीपीएस बढ़ाकर 4.40 प्रतिशत कर दी। नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) को 50 आधार अंकों से बढ़ाकर 4.50 प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया है, जो कि 21 मई से लागू होगा। उनके अनुसार जैसे-जैसे रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध जारी है और प्रतिबंध तेज होते जा रहे हैं, महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। युद्ध से कमोडिटी और वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बनी है और बढ़ रही है, जिससे वैश्विक आर्थिक सुधार की गति कम होती जा रही है। शक्तिकांत दास का कहना है कि हमने मुद्रास्फीति को लक्ष्य के भीतर रखने के लिए 'उदार' को वापस लेने के अपने इरादे की घोषणा की है। मगर फिलहाल मौद्रिक नीति अभी भी उदार बनी हुई है। जैसा कि हम इस कठिन दौर से गुजर रहे हैं, नई वास्तविकताओं के प्रति संवेदनशील होना आवश्यक है।

खुदरा महंगाई बढ़ी

खुदरा महंगाई बढ़ी

आरबीआई गवर्नर का कहना है कि उदार बने रहने से, मौद्रिक नीति अनुकूल वित्तीय स्थितियों को बढ़ावा देती है। उन्होंने बताया कि हाल ही में जीडीपी के आंकड़ों से पता चलता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था गति खो रही है। शक्तिकांत दास ने कहा कि मार्च में खुदरा महंगाई बढ़ी, जिसके अप्रैल में और बढ़ने की संभावना है। उन्होंने कहा, "अगर यह परिदृश्य सामने आता है तो यह उम्मीदों को कम कर सकता है और विकास को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने कहा कि स्थिति गतिशील है और तेजी से बदलाव और कार्यों के अनुरूप होना चाहिए।

एसडीएफ और एमएसएफ

एसडीएफ और एमएसएफ

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि एसडीएफ (स्थायी जमा सुविधा) को 4.15 फीसदी और एमएसएफ (सीमांत स्थायी सुविधा) को 4.65 फीसदी पर एडजस्ट किया गया है।

ये है रेपो रेट का सफर

-4 मई 22 को 4.40 फीसदी
-10 फरवरी 22 को 4 फीसदी
-8 दिसंबर 21 को 4 फीसदी
-8 अक्टूबर 21 को 4 फीसदी
-6 अगस्त 21 को 4 फीसदी
-4 जून 21 को 4 फीसदी
-7 अप्रैल 21 को 4 फीसदी
-5 फरवरी 21 को 4.00 फीसदी
-4 दिसंबर 20 को 4.00 फीसदी
-9 अक्टूबर 20 को 4.00 फीसदी
-6 अगस्त 20 को 4.00 फीसदी
-22 मई 2020 को 4.00 फीसदी

जानिए कुछ और अवधियों की रेपो रेट

जानिए कुछ और अवधियों की रेपो रेट

-27 मार्च 2020 को 4.40 फीसदी
-4 अक्टूबर 2019 को 5.15 फीसदी
-7 अगस्त 2019 को 5.40 फीसदी
-6 जून 19 को 5.75 फीसदी
-04 अप्रैल 19 को 6.00 फीसदी
-07 फरवरी 19 को 6.25 फीसदी
-05 दिसंबर 18 को 6.50 फीसदी
-05 अक्टूबर 18 को 6.50 फीसदी
-01 अगस्त 18 को 6.50 फीसदी
-06 जून 18 को 6.25 फीसदी
-05 अप्रैल 18 को 6.00 फीसदी
-07 फरवरी 18 को 6.00 फीसदी
-06 दिसंबर 17 को 6.00 फीसदी
-04 अक्टूबर 17 को 6.00 फीसदी
-02 अगस्त 17 को 6.00 फीसदी
-08 जून 17 को 6.25 फीसदी
-06 अप्रैल 17 को 6.25 फीसदी
-08 फरवरी 17 को 6.25 फीसदी
-07 दिसंबर 16 को 6.25 फीसदी
-04 अक्टूबर 16 को 6.25 फीसदी
-05 अप्रैल 16 को 6.50 फीसदी
-29 सितंबर 15 को 6.75 फीसदी
-02 जनवरी 15 को 7.25 फीसदी
-04 मार्च 15 को 7.50 फीसदी
-15 जनवरी 15 को 7.75 फीसदी
-28 जनवरी 14 को 8.00 फीसदी

ईएमआई और फूड आइटम

ईएमआई और फूड आइटम

आरबीआई के रेपो रेट बढ़ने से नए उधारकर्ताओं की ईएमआई बढ़ेगी। इसका प्रभाव उन लोगों पर नहीं पड़ेगा, जिन्होंने पहले से लोन ले रखा है। वहीं आरबीआई गर्वनर ने यह भी कहा है कि फूड प्राइस में बढ़ोतरी जारी रहेगी।

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