नई दिल्ली, जुलाई 28। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की ईस्टर्न बेंच ने एक आदेश जारी किया, जिसमें कोलकाता और हावड़ा सहित पंश्चिम बंगाल के 32 शहरों में छह महीने के अंदर वे सभी वाहन, फिर चाहे वे कमर्शियल हों और या प्रावइेट, जो 15 साल से अधिक पुराने हैं, को स्क्रैप करने की बात कही गयी है। एनजीटी ने पुराने सार्वजनिक परिवहन (बसों और कैब) को भी चरणबद्ध तरीके से बंद करने का आदेश दिया, जिनमें भारत स्टेज IV से कम के उत्सर्जन मानदंड हैं। एनजीटी के इस फैसले से 70 लाख वाहनों पर तलवार लटक गयी है।
70 लाख से अधिक वाहन होंगे बंद
एनजीटी के फैसले से मार्च 2023 तक शहर में 20 लाख से अधिक और राज्य के बाकी हिस्सों में 70 लाख से अधिक वाहनों को बंद किया जा सकता है। एनजीटी के इस आदेश से राज्य के वाहन मालिकों के बीच हड़कंप मच गया है। असल में केंद्र और राज्य के नियमों में 20 साल बाद निजी कारों को चरणबद्ध तरीके से बंद करने का आदेश दिया गया है।
कलकत्ता हाई कोर्ट (एचसी) का पुराना आदेश
कलकत्ता एचसी ने 2008 में कोलकाता मेट्रोपॉलिटन एरिया में केवल 15 साल पुराने वाणिज्यिक वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने का आदेश दिया था। निजी वाहनों को इस प्रतिबंध के दायरे से बाहर रखा गया था। कमर्शियल सेगमेंट में भी, अप्रैल 2010 में कोलकाता सहित 13 प्रमुख भारतीय शहरों में बीएस-IV मानदंड पेश किए जाने के बाद से पब्लिक ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों के बीच भ्रम की स्थिति थी। इसका मतलब है कि कई बीएस-III वाहनों के पास अभी भी तीन साल का समय बाकी है, जब तक वे 15 साल पुराने नहीं हो जाते।
कोलकाता में लाखों पुराने वाहन
मालूम हो कि पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में ही अकेले ऐसे 1,820,382 निजी वाहन हैं जो 15 साल से अधिक पुराने हो चुके हैं। वहीं राज्य भर में ऐसे 65 लाख से अधिक निजी वाहन हैं, जिन्हें अब सड़कों से हटाया जाना है। कोलकाता में इस समय जितने कमर्शियल वाहन चल रहे हैं उनमें से कम से कम 219,137 वाहन 15 वर्ष से अधिक पुराने हो गये हैं। पूरे राज्य में पुराने कमर्शियल वाहनों की संख्या 6 लाख से ज्यादा है।
ई-वाहनों को मिलेगा प्रोत्साहन
एनजीटी के आदेश पर नजर डालें तो उसमें कहा गया है कि पुराने वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाते हुए कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) बसों और इलेक्ट्रिक बसों को शुरू किया जाना चाहिए और स्वच्छ और हरित प्रौद्योगिकी वाहनों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। 2021 में एनजीटी में एक कार्यकर्ता सुभाष दत्ता ने याचिका दायर की थी। उनके अनुसार एनजीटी का यह आदेश ऐतिहासिक है।
1 करोड़ पुराने वाहनों का दावा
दत्ता ने फैसले पर कहा है कि यह तो अभी शुरुआत है। असली काम यहीं से शुरू होना है। उनके अनुमान के अनुसार राज्य में लगभग 1 करोड़ ऐसे पुराने वाहन चल रहे हैं और इन सभी को 6 महीने की अवधि के भीतर समाप्त करना संभव नहीं है। हम इसे लेकर चिंतित हैं और इस मामले को और सक्रियता से आगे बढ़ा रहे हैं।


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