नयी दिल्ली। लॉकडाउन में आम जनता के लिए एक राहत भरी खबर आई है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय, भारत सरकार की तरफ से जारी किए आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल में देश में खुदरा महंगाई दर गिर कर 5.84 फीसदी रह गई। मार्च में खुदरा महंगाई दर 5.91 फीसदी रही थी। बता दें कि ये खुदरा महंगाई का पिछले 4 महीनों का सबसे निचला स्तर है। फिर भी खुदरा महंगाई भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के मध्यम अवधि के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से लगातार छठे महीने अधिक रही। खाद्य वस्तुओं पर खुदरा महंगाई, जो रसोई के बजट में बदलाव मापने के लिए एक तरीका है, अप्रैल में 8.76 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रही।

सामान्य नहीं हैं आंकड़े
हालांकि मंत्रालय ने साफ किया है कि अपर्याप्त डेटा कलेक्शन के कारण अप्रैल के लिए सामान्य कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (सीपीआई) आंकड़े जारी नहीं किए गए हैं। अप्रैल 2020 के लिए प्राइस डेटा बड़े पैमाने पर निर्दिष्ट आउटलेट से टेलीफोन पर बात करके इकट्ठे किया गया है। प्राइस डेटा आमतौर पर चुनिंदा 1,114 शहरी बाजारों और 1181 गावों से इकट्ठे किए जाते हैं। ये डेटा एनएसओ के फील्ड ऑपरेशंस डिवीजन के फील्ड कर्मचारियों द्वारा व्यक्तिगत यात्राओं के माध्यम से जुटाए जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ता मुद्रास्फीति 6.09 प्रतिशत रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में ये 5.59 प्रतिशत रही।
औद्योगिक और विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन घटा
मार्च में देश का औद्योगिक उत्पादन 16.7 प्रतिशत घटा, जबकि फरवरी में इसमें 4.5 फीसद की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। इसके पीछे मुख्य वजह लॉकडाउन के कारण खनन, विनिर्माण और बिजली क्षेत्र का खराब प्रदर्शन है। पिछले साल मार्च में 3.1 प्रतिशत की वृद्धि के मुकाबले इस साल मार्च में विनिर्माण क्षेत्र उत्पादन में 20.6 प्रतिशत की गिरावट आई। इस दौरान बिजली उत्पादन में 2.2 प्रतिशत की वृद्धि के मुकाबले 6.8 प्रतिशत की गिरावट आई। खनन क्षेत्र का उत्पादन पहले के 0.8 प्रतिशत की वृद्धि के मुकाबले सपाट रहा।


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