नई दिल्ली, जनवरी 11। वोडाफोन आइडिया (वीआई) के शेयर मंगलवार सुबह 11 फीसदी से अधिक टूट गए। मगर आखिर में करीब 21 फीसदी की कमजोरी के साथ बंद हुए। असल में कंपनी ने घोषणा की कि वह स्पेक्ट्रम और एजीआर (एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू) बकाया के लिए सरकार को 35.8 फीसदी की पेशकश करेगी। कंपनी ने आज कहा कि वोडाफोन आइडिया के निदेशक मंडल ने स्पेक्ट्रम नीलामी किस्तों और एजीआर बकाया राशि से संबंधित ब्याज की पूरी राशि को इक्विटी में बदलने की मंजूरी दे दी है। इस कंवर्जन से सरकार के पास कंपनी की लगभग 35.8 फीसदी हिस्सेदारी होगी। वहीं प्रमोटर शेयरधारकों में से लगभग 28.5 फीसदी वोडाफोन समूह और लगभग 17.8 फीसदी आदित्य बिड़ला समूह के पास होगी।

सरकार बनेगी सबसे बड़ी हिस्सेदार
करीब 36 फीसदी हिस्सेदारी के साथ केंद्र सरकार वीआई की सबसे बड़ी हिस्सेदार बन जाएगी। अक्टूबर 2021 में राहत पैकेज के तहत दूरसंचार विभाग ने वैधानिक बकाया राशि को चुकाने के लिए कई विकल्प रखे थे, जिसके बाद वोडाफोन आइडिया ने स्पेक्ट्रम नीलामी की किश्तों और एजीआर बकाया के भुगतान को 4 साल तक टालने का विकल्प चुना। वीआई के शेयर भारत सरकार की ओर से यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया (एसयूयूटीआई) के वैधानिक अंडरटेकिंग के माध्यम से या किसी ट्रस्टी-प्रकार या अन्य उपयुक्त व्यवस्था के माध्यम से लिए और रखे जा सकते हैं।
चुकाना था ब्याज
हालाँकि, दूरसंचार कंपनियों को इस मोहलत वाली अवधि के दौरान इन बकाए पर ब्याज का भुगतान करना आवश्यक था। दूरसंचार विभाग ने आगे कंपनियों को यह तय करने के लिए 90-दिन का समय दिया था कि क्या वे अधिस्थगन अवधि से संबंधित ब्याज राशि को इक्विटी में बदलने का विकल्प चुनना चाहती हैं। भारती एयरटेल ने पिछले साल एजीआर और स्पेक्ट्रम बकाया पर चार साल की मोहलत का विकल्प चुना था। इस महीने की शुरुआत में एयरटेल ने आस्थगित स्पेक्ट्रम और एजीआर बकाया पर ब्याज को इक्विटी में नहीं बदलने का फैसला किया। मगर वीआई ने इसे इक्विटी में बदलने का फैसला किया है।


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