नई दिल्ली, सितंबर 07। एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के पूर्व सीईओ और एमडी रवि नारायण को मनी लॉन्ड्रिंग संबंधित मामले में गिरफ्तार किया है। नारायण एनएसई को-लोकेशन स्कैम के आरोपी है और उनपर पद पर बने रहते हुए कर्मचारियों के फोन टैपिंग कराने का आरोप है।

2017 में दे दिया था स्तीफा
रवि नारायण अप्रैल 1994 से 31 मार्च 2013 तक एनएसई में एक्सचेंज के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के पद पर थे। इसके बाद नारायण 1 अप्रैल 2013 से नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) बोर्ड में नॉन-एग्जीक्यूटिव कैटेगरी के वाइस-चेयरमैन के रूप में नियुक्त किए गए। 1 जून 2017 को उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
चित्रा रामकृष्ण भी हुई थी गिरफ्तार
ईडी ने रवि से पहले एनएसई को-लोकेशन के मामले में एनएसई की एक अन्य पूर्व एमडी और सीईओ चित्रा रामकृष्ण को भी गिरफ्तार किया था। को-लोकेशन मामले की जांच सीबीआई भी समानांतर रूप से कर रही है। CBI ने भी रामकृष्ण को को-लोकेशन मामले में गिरफ्तार किया था।
संजय पांडे की भी हुई है गिरफ्तारी
ईडी ने 19 जुलाई को ही फोन टैपिंग के आरोप में मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त संजय पांडे को अरेस्ट किया था। जांच एजेंसी ने अदालत में संजय को पेश करने पर बताया था कि एनएसई में "फोन कॉल की टैपिंग" पूर्व पुलिस आयुक्त और उनके परिवार के सदस्यों की एक कंपनी के माध्यम से की जा रही थी। ईडी ने जुलाई में मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त संजय पांडे और एनएसई के पूर्व प्रमुखों के खिलाफ 2009 और 2017 के बीच एनएसई कर्मचारियों के फोन टैप करने के आरोप मामला दर्ज किया था।
क्या है को-लोकेशन मामला
एनएसई को-लोकेशन मामले में पहली एफआईआर साल 2018 में दर्ज की गई थी। कुछ बड़े अधिकारियों के मिलीभगत से ब्रोकरों को शेयर को खरीदने और बेचने वाले देश के प्रमुख नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के सर्वर के पास ऑफिस ऑपरेट करने की अनुमति दे दी गई थी। इसकी मदद से ब्रोकरों को शेयरो के दामों की जानकारी कुछ सेकेंड पहले हो जाती थी। इस सुविधा का लाभ उठा कर ब्रोकर भारी मुनाफा कमा रहे थे। आरोप में कहा गया है कि कुछ ब्रोकर्स को सर्वर को को-लोकेट करके सीधा एक्सेस उपलब्ध कराया गया था।


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