नई दिल्ली, नवंबर 30। वित्त वर्ष 2021-22 की दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) 8.4 प्रतिशत की दर से बढ़ी। इस बात का खुलासा 30 नवंबर को जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों में हुआ है। पिछले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में कोरोना से लगे झटके के मुकाबले ये आंकड़े काफी बेहतर है। पिछले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में जीडीपी में 7.4 प्रतिशत की गिरावट आई थी। वहीं 2021-22 की पिछली तिमाही में, भारतीय अर्थव्यवस्था 20.1 प्रतिशत की रिकॉर्ड गति से बढ़ी थी। 2020-21 की दूसरी तिमाही में 32.97 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले 2021-22 दूसरी तिमाही में कॉन्सटैंट प्राइस पर जीडीपी 35.73 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अनुसार यह जीडीपी में 7.4% गिरावट की तुलना में 8.4% की वृद्धि दर्शाता है। पिछले वर्ष की समान तिमाही में (-)7.3 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि की तुलना में दूसरी तिमाही में सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) में 8.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। जीवीए में, विशेष रूप से, पिछली तिमाही में 18.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी, जबकि निजी अंतिम उपभोग व्यय (पीएफसीई) में 19.35 प्रतिशत की तेजी से वृद्धि हुई थी।
जानिए पहले कितनी रही है जीडीपी
2020 में अप्रैल से जून के दौरान भारत की जीडीपी 24.4 प्रतिशत गिरी थी, जबकि तीसरी तिमाही यानी अक्टूबर से दिसंबर 2020 के दौरान इसमें 0.4 फीसदी की बढ़त दिखी थी। जनवरी से मार्च 2021 में जीडीपी 1.6 फीसदी बढ़ी थी। वहीं अप्रैल से जून 2021 के दौरान इसमें 20.1 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई थी।
जानिए क्या होती है जीडीपी
ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (जीडीपी) किसी भी देश में 1 साल में देश में पैदा होने वाले सभी सामानों और सेवाओं की कुल वैल्यू के योग को कहा जाता है। आमतौर पर इसे भारत में सकल घरेलू उत्पाद भी बोला जाता है। जानकारों के अनुसार जीडीपी ठीक वैसी ही है, जैसे की मार्कशीट। जैसे मार्कशीट से पता चलता है कि छात्र ने सालभर में कैसा प्रदर्शन किया है, ठीक उसी तरह जीडीपी के डिटेल से पता चलता है कि देश की आर्थिक स्थिति कैसी है।
कोर सेक्टर ग्रोथ
कोर सेक्टर ग्रोथ के भी आंकड़े जारी किए गए हैं। इस साल अक्टूबर में आठ प्रमुख क्षेत्रों का उत्पादन 7.5% बढ़ा। सितंबर 2021 में इंडेक्स 4.4% की बढ़ोतरी के साथ 126.7 रहा। आठ क्षेत्रों में कोयला, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली शामिल हैं।
राजकोषीय घाटा
भारत का राजकोषीय घाटा अप्रैल से अक्टूबर तक चालू वित्त वर्ष के पहले सात महीनों के लिए पूरे साल के बजट अनुमान का 36.3% तक पहुंच गया है। इस बात का खुलासा आज जारी किए गए सरकारी आंकड़ों में हुआ है। राजकोषीय अंतर 5.47 लाख करोड़ रुपये रहा। शुद्ध टैक्स प्राप्तियां 10.53 लाख करोड़ रुपये रहीं, जबकि कुल व्यय 18.27 लाख करोड़ रुपये था। सरकार ने इस साल के राजकोषीय घाटा के 6.8 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था।
अनुमान के अनुसार रहे जीडीपी आंकड़े
आपको बता दें कि दूसरी तिमाही के जीडीपी के आंकड़े प्रमुख ब्रोकरेज और वित्तीय संस्थानों के अनुमानों के अनुरूप रहे। उदाहरण के लिए, इंडिया रेटिंग्स ने अर्थव्यवस्था के दूसरी तिमाही में 8.3 प्रतिशत बढ़ने और वित्त वर्ष 22 में 9.4 प्रतिशत बढ़ने के अंत का अनुमान लगाया था। इसी तरह गोल्डमैन सैक्स ने चालू वित्त वर्ष के लिए 9.1 फीसदी और एचडीएफसी बैंक ने सितंबर तिमाही के लिए 7.3 फीसदी विकास दर का अनुमान लगाया।
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