नयी दिल्ली। ये एक ऐसा समय है जब कोरोनावायरस के कारण आर्थिक मंदी की चिंताओं को लेकर वैश्विक बाजारों में बिकवाली देखने को मिल रही है और इससे भारतीय शेयर बाजार में भी भारी गिरावट आयी है। निवेशकों का भरोसा डगमगा गया है और वे लगातार बिकवाली कर रहे हैं। मगर वे कंपनियां जिनके पास भरपूर कैश है उन्होंने निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए एक तरकीब निकाली है। कैश से मालामाल कंपनियां अपने निवेशकों से शेयर बायबैक करने की सोच रही हैं। जब कोई कंपनी किसी शेयरहोल्डर से अपने ही शेयर वापस खरीदती है तो उसे शेयर बायबैक कहते हैं। कंपनियां इसके जरिये निवेशकों का भरोसा जीतना चाहती हैं।
बायबैक में है एक अड़चन
मगर शेयर बायबैक में कंपनियों के सामने एक अड़चन है। दरअसल शेयर बायबैक पर एक टैक्स है और बाजार निवेशकों के मद्देनजर कंपनियां और कंपनी के प्रमोटर केंद्र सरकार से इसी टैक्स को वापस लेने का एक साल से अनुरोध कर रही हैं। इस समय सन फार्मा ने 1700 करोड़ रुपये, थॉमस कुक ने 150 करोड़ रुपये और सुपर पेट्रोकेम ने 62.67 करोड़ रुपये के शेयर बायबैक करने का प्रस्ताव रखा है। इनके अलावा इमामी और कल्पतरु भी शेयर बायबैक की योजना बना रही हैं।
और भी कंपनियां करेंगी बायबैक
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल के चेयरमैन रामदेव अग्रवाल ने कहा है कि कई और कंपनियां आने वाले दिनों में बायबैक की घोषणा कर सकती हैं, लेकिन सरकार को एक साल के लिए बायबैक टैक्स को हटा देना चाहिए या कम से कम निलंबित कर देना चाहिए, ताकि जिन कंपनियों या प्रमोटरों को अपने कारोबार पर भरोसा है, वे शेयर बाजार की इस भारी गिरावट के दौरान बाजार से शेयर वापस खरीद सकें। उनका कहना है कि किसी भी अन्य रिसोर्सेज की तुलना में कॉर्पोरेट रिसोर्सेड बहुत बड़े हैं जो स्टॉक मूल्य में स्थिरता ला सकते हैं।
क्यों किया जाता है बायबैक
जानकारी के लिए बता दें कि बायबैक प्रोसेस पूरा होने के बाद उन शेयरों का वजूद समाप्त हो जाता है, जो शेयर कंपनी शेयरहोल्डर से खरीदती है। बायबैक के लिए कंपनियाँ टेंडर ऑफर या ओपन मार्केट का रास्ता चुनती हैं। जिन कारणों से कंपनियां शेयर बायबैक करती हैं उनमें सबसे अहम वजह कंपनी की बैलेंस शीट में अतिरिक्त नकदी का होना है। किसी कंपनी के पास बहुत ज्यादा नकदी का होना अच्छा नहीं माना जाता। इससे माना जाता है कि कंपनी अपनी नकदी का उपयोग नहीं कर पा रही है। शेयर बायबैक के जरिये कंपनी अपने अतिरिक्त नकदी का इस्तेमाल करती है। साथ ही कई बार कंपनी को लगता है कि उसके शेयर की कीमत कम यानी अंडरवैल्यूड है, तो वह बायबैक के जरिये उसे बढ़ाने की कोशिश करती है।
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