For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS  
For Daily Alerts

भारी भूल : निवेश कर भूल गए, अब 1,448 करोड़ रु मिलना हो रहा कठिन

|

नई दिल्ली, सितंबर 22। शेयर बाजार में निवेशकों को लंबे समय में ही तगड़ा रिटर्न मिल सकता है। कुछ ऐसी ही एक निवेशक के साथ हुआ है, जिसने अपने कुछ रिश्तेदारों के साथ मिल कर 43 साल पहले एक कंपनी के शेयर खरीदे थे। उन शेयरों की वैल्यू आज करीब 1450 करोड़ रु हो गयी है। मगर कंपनी उन्हें ये रकम देने से मना कर रही है और इस निवेशक को एक लीगल बैटल में शामिल होना पड़ा है। ये दिलचस्प कहानी है कोच्चि के बाबू जॉर्ज वालावी की।

 

मालामाल करने वाले 5 शेयर : सिर्फ 5 दिन में दिया 60 फीसदी तक रिटर्न, जानिए नाम

खरीदे थे 3500 शेयर

खरीदे थे 3500 शेयर

74 साल की उम्र में बाबू अपने जीवन की सबसे अहम जंग में शामिल हुए हैं। दाव पर बहुत कुछ लगा है। अगर वह जीते तो उन्हें और उसके परिवार के चार सदस्यों को 1,448.5 करोड़ रुपये मिलेंगे। बाबू का मानना है कि उनका पक्ष काफी मजबूत है। कोच्चि के रहने वाले बाबू ने चार अन्य करीबी रिश्तेदारों के साथ अप्रैल 1978 में मेवाड़ ऑयल एंड जनरल मिल्स लिमिटेड (जो आज पीआई इंडस्ट्रीज के नाम से जानी जाती है) के 3,500 शेयर खरीदे, जो उसके लगभग 2.8% शेयर थे।

50000 करोड़ रु है मार्केट कैपिटल
 

50000 करोड़ रु है मार्केट कैपिटल

आज पीआई इंडस्ट्रीज की मार्केट कैपिटल 50000 करोड़ रु है। 43 साल पहले जब बाबू ने शेयर खरीदे थे, तब यह एक साधारण और अनलिस्टेड कंपनी थी। आज कंपनी का शेयर करीब 3270 रु पर बंद हुआ है। कैलकुलेशन के हिसाब से आज वालावी परिवार के पास लगभग 42.48 लाख शेयर होने चाहिए। मौजूदा वैल्यूएशन पर, उन शेयरों की कीमत 1,448.5 करोड़ रुपये है।

कंपनी ने नहीं दिया पैसा

कंपनी ने नहीं दिया पैसा

बाबू और परिवार के अन्य चार सदस्यों को कंपनी की प्रोग्रेस के बारे में सूचित नहीं किया गया और इन सालों में लाभांश, बोनस शेयर, विभाजन, आदि के रूप में कंपनी के फायदे से भी वंचित कर दिया गया। इतना ही नहीं कंपनी अब कहती है कि बाबू और उनके परिवार के सदस्य अब इसके शेयरधारक नहीं हैं, क्योंकि उनके शेयर 1989 में दूसरों को ट्रांसफर कर दिए गए थे।

क्या कहता है नियम

क्या कहता है नियम

बाबू के बेटे के अनुसार ऑरिजनल शेयर उनके पास सेफ हैं। कंपनी अधिनियम के अनुसार, डुप्लिकेट शेयर जारी करने के लिए, शेयरधारक को कंपनी के पक्ष में एफआईआर, समाचार पत्र विज्ञापन, क्षतिपूर्ति बॉन्ड का निष्पादन और एक हलफनामा देना होता है। पर इस परिवार ने कंपनी को ऐसा कोई दस्तावेज नहीं दिया है और न ही डुप्लीकेट शेयर जारी करने के लिए कहा है।

2016 में हुआ था संपर्क

2016 में हुआ था संपर्क

पीआई इंडस्ट्रीज ने जनवरी 2016 में अपने तत्कालीन निदेशक और अब संयुक्त प्रबंध निदेशक, रजनीश सरमा को पूर्व महाप्रबंधक सी एचएन राव के साथ कोच्चि को बाबू से मिलने और मूल शेयर सर्टिफिकेट को सत्यापित करने के बाद इस मुद्दे को सुलझाने के लिए भेजा। बाबू कहते हैं कि उन्होंने मूल सर्टिफिकेट की वास्तविकता की पुष्टि की थी और उन्हें सूचित किया था कि वे इस मामले पर अध्यक्ष के साथ चर्चा करेंगे। बाबू कहते हैं कंपनी की ओर से कोई कार्रवाई नहीं होने के बाद, उन्होंने चेयरमैन से संपर्क किया, लेकिन वह टाल-मटोल कर रहे थे।

सेबी को किया अप्रोच

सेबी को किया अप्रोच

वालावी परिवार ने शेयर बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) से संपर्क किया। लेकिन, सेबी के सवालों के जवाब में, पीआई इंडस्ट्रीज इस मामले पर अड़ी रही कि शेयरों को 1989 में अन्य लोगों को हस्तांतरित किया गया था। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार बाबू कहते हैं कि एक संभावना यह भी हो सकती है कि कंपनी के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा "धोखाधड़ी" की गई हो। बाबू का कहना है कि सेबी ने करोड़ों की "धोखाधड़ी" की जांच बंद नहीं की है। बाबू को अब भी उम्मीद थी कि एक सौहार्दपूर्ण समझौता हो जाएगा।

English summary

Big mistake babu valavi Forgot after invest now it is getting difficult to recover Rs 1448 crore

Today the market capital of PI Industries is Rs 50000 crores. When Babu bought the shares 43 years ago, it was an ordinary and unlisted company. Today the company's stock has closed at around Rs 3270.
Company Search
Thousands of Goodreturn readers receive our evening newsletter.
Have you subscribed?
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X