नयी दिल्ली। कोरोना के कारण हो रहे नुकसान के बीच बहुत सारी कंपनियों ने अपने कर्मचारियों की सैलेरी काटी है। ऐसी कंपनियों के कर्मचारियों को सलाह दी जाती है कि ये वेतन कटौती उनके वेतन (बेसिक, एचआरए आदि) के घटकों में भी दिखे। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि अगर सैलेरी में कटौती किसी और तरीके से की गई है तो आयकर विभाग ऐसी कटौती पर विचार न करते हुए इसे देय वेतन (Salary Due) मान लेगा। कुछ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ऐसे मामले में सैलेली पर टैक्स इस बात पर निर्भर करेगा कि वेतन कटौती आपकी सैलेरी में कटौती है या फिर फिलहाल के लिए टाल (आस्थगन) दी गई, जबकि कुछ का कहना है कि सैलेरी पर टैक्स का अंतिम फैसला फॉर्म 16 के जरिए होगा। आयकर कानूनों के अनुसार वेतन पर टैक्स बकाया या प्राप्त, जो भी पहले हो, के आधार पर लगाया जाता है। जबकि टीडीएस भुगतान करते समय काटा जाता है। ध्यान रखें कि सैलेरी कटौती आपके वेतन के घटकों में दिखनी चाहिए। साथ ही आप कंपनी से ये भी जवाब लें कि ये सैलेरी में कटौती है या इसका भुगतान बाद में किया जाएगा, वरना आपको बिना वजह का टैक्स देना पड़ सकता है।
सैलेरी स्लिप में दिखे कम वेतन
टैक्स एक्सपर्ट्स बताते हैं कि यदि किसी कर्मचारी के सीटीसी में कोई संशोधन (कटौती या बढ़ोतरी) होती है, तो इस तरह के बदलाव को सैलेरी स्लिप में भी दिखना चाहिए। यानी वेतन के घटक जैसे कि बेसिक, एचआरए, विशेष भत्ता आदि में समान बदलाव किया जाना चाहिए। यदि इन घटकों में बदलाव नहीं किया जाता है, तो इन घटकों उलट सैलेरी स्लिप में बताई गई राशि के आधार पर आपके वेतन पर टैक्स लगेगा चाहे आपको असल में कितनी भी पेमेंट मिली हो। आयकर विभाग आपकी सैलेरी स्लिप में मौजूद घटकों के आधार पर ही टैक्स लगाएगा।
सैलेरी मिले न मिले टैक्स लगेगा
आयकर कानूनों के अनुसार कंपनी में आपका जो वेतन तय होता है उसी पर टैक्स लगता है। फिर भले ही आपको वेतन मिला हो या नहीं। सैलेरी स्ट्रक्चर के घटकों के मुताबिक उसकी सैलेरी पर टैक्स देनदारी की गणना की जाएगी। ऐसे में सैलेरी कटने पर अगर सैलेरी घटकों में संशोधन नहीं किया जाता है तो आयकर विभाग देय राशि पर विचार नहीं करेगा और कर्मचारी को उसी पर ही टैक्स का भुगतान करने के लिए कहेगा। इसलिए अगर आपकी सैलेरी कटे तो सैलेरी में बदलाव और कंपनी से जवाब भी लें।
नियमो में है कमी
एक अन्य जानकार सैलेरी पर टैक्स और टीडीएस के मामले में नियमों में विसंगति (Inconsistency) का हवाला देते हुए कहते हैं कि वर्तमान आयकर कानूनों के अनुसार कर्मचारी के वेतन पर 'देय या प्राप्त', जो भी पहले हो, के आधार पर टैक्स लगता है। हालांकि वेतन पर टीडीएस केवल भुगतान के समय काटा जाता है। इसके अलावा, यह स्पष्ट नहीं है कि कंपनी/एम्प्लोयर को फॉर्म -16 में कर्मचारी को दी जाने वाली बकाया राशि का उल्लेख करना जरूरी है या नहीं। ध्यान रखें कि आपके सीटीसी के केवल वे निश्चित घटक जिनका भुगतान आपको किया जाना है, पर ही टैक्स लगेगा।
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