नई दिल्ली, अगस्त 31। अरबपति मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) नॉर्वे की सोलर मॉड्यूल निर्माता कंपनी आरईसी ग्रुप को चाइना नेशनल केमिकल कॉर्प (केमचाइना) से 1-1.2 अरब डॉलर में खरीदने जा रही है। रिलायंस क्लीन एनर्जी सेक्टर में 75000 करोड़ रु निवेश करेगी। इसी प्लान के तहत यह आरईसी को खरीदेगी। डील के लिए फाइनेंसिंग में लगभग 50-60 करोड़ डॉलर जुटाने के लिए कंपनी वैश्विक बैंकों के साथ बातचीत कर रही है, जबकि बाकी पैसे का इंतजाम इक्विटी के जरिए फाइनेंस किया जाएगा। इसके अलावा इस डील से रिलायंस के लिए अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी और ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग कैपेबिलिटीज तक एक्सेस हासिल करने के दरवाजे खुलेंगे। रिलायंस सौर ऊर्जा सेक्टर में विस्तार करने की अपनी योजना पर काम कर रही है।

25 साल पुरानी है आरईसी
1996 में स्थापित आरईसी ग्रुप सरकारी केमिकल प्रमुख केमचाइना का एक अंतरराष्ट्रीय "सदस्य" है, जो पिरेली टायर्स और सिनजेंटा में सबसे बड़ा शेयरधारक है। आरईसी ग्रुप की सालाना सोलर पैनल उत्पादन क्षमता 1.8 गीगावाट (जीडब्ल्यू) है और इसने विश्व स्तर पर लगभग 10 जीडब्ल्यू क्षमता स्थापित की है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि भारत 2022 तक 100 गीगावाट सौर ऊर्जा सहित 175 गीगावाट रिन्युएबल कैपेसिटी डेवलप करने की तैयारी कर रहा है।
इन कंपनियों का है दबदबा
मौजूदा समय में सोलर उपकरण बाजार में बीजिंग स्थित कंपनियों जैसे ट्रिना सोलर, ईटी सोलर और जिन्को सोलर का वर्चस्व है। भारत में सोलर सेल के लिए केवल 3 गीगावाट और सोलर मॉड्यूल के लिए 15 गीगावाट की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता है। चीन पर बहुत अधिक निर्भर करते हुए, जो कि दुनिया के तीन-चौथाई से अधिक पॉलीसिलिकॉन का आपूर्तिकर्ता है, भारत और अमेरिका जैसे टॉप कंज्यूमर अब लोकल मैन्युफैक्चरिंग या सप्लाई सोर्सेज का विस्तार कर रहे हैं।
सोलर पावर का इस्तेमाल बढ़ रहा
बर्नरेउटर रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार 2019 में सौर ऊर्जा को दुनिया में नई बिजली उत्पादन क्षमता के टॉप सोर्स के रूप में जगह दी गयी थी। इसमें लगभग 33 प्रतिशत पॉलीसिलिकॉन जो सौर पैनल बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया, वह चीन के झिंजियांग प्रांत से आया था। बहरहाल रिलायंस और आरईसी के बीच डील की घोषणा बहुत जल्द की जा सकती है।


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