नयी दिल्ली। भारत के 70 लाख क्रेडिट और डेबिट कार्डधारकों के लिए एक बुरी खबर है। दरअसल 70 लाख भारतीय क्रेडिट और डेबिट कार्डधारकों का डेटा लीक हो गया। इन क्रेडिट और डेबिट कार्डधारकों से संबंधित संवेदनशील डेटा डार्क वेब के माध्यम से ऑनलाइन सामने आया है। इस डेटा में कार्डधारकों का न सिर्फ नाम बल्कि मोबाइल नंबर, इनकम लेवल, ईमेल एडरेस और पैन नंबर तक शामिल है। यह गूगल ड्राइव लिंक के माध्यम से डाउनलोड के लिए भी उपलब्ध है। ये लिंक पब्लिक एक्सेस के लिए खुला है और कुछ दिनों से डार्क वेब पर उपलब्ध है।
साइबरसिक्योरिटी रिसर्चर को मिला लिंक
गैजेट्स 360 की रिपोर्ट के अनुसार एक साइबसिक्योरिटी रिसर्चर को इस महीने की शुरुआत में डार्क वेब से ये गूगल ड्राइव लिंक मिला। ये "क्रेडिट कार्ड होल्डर्स डेटा" टाइटल के साथ सर्कुलेशन में था। इस लिंक में 59 एक्सेल फाइल्स हैं, जिसमें पूरा नाम, मोबाइल नंबर, शहर, इनकम लेवल और कार्डधारकों के ईमेल पते शामिल थे। इसके अलावा पैन कार्ड नंबर, एम्प्लोयर डिटेल और प्रभावित क्रेडिट और डेबिट कार्ड उपयोगकर्ताओं के बैंक खाते का प्रकार भी शामिल है। हालाँकि लीक हुए आंकड़ों में कार्डधारकों के बैंक खाते और कार्ड नंबर शामिल नहीं हैं।
रिसर्चर का डिटेल भी शामिल
आपको जानकर हैरानी होगी मगर जिस रिसर्चर को ये लिंक मिला लीक डेटा में उसका निजी डेटा भी शामिल था। उन्होंने एक्सेल फाइलों में लिस्टेड कुछ नामों की लिंक्डइन पर खोज कर या कॉलर आईडी ऐप Truecaller पर सर्फ किए गए मोबाइल नंबरों के जरिए पहचान भी की। हालाँकि इस डेटा में उन बैंकों का कोई स्पष्ट रेफ्रेंस नहीं है जिनके कार्डधारकों की डिटेल लीक हो गई हैं, मगर इसमें अधिकांश कार्डधारकों का पहला स्वाइप अमाउंट शामिल है। कार्डधारकों ने अपने मोबाइल पर अलर्ट चालू कर रखा है या नहीं ये डिटेल भी इस लीक डेटा में शामिल है।
थर्ड पार्टी से जुड़ा हो सकता है डेटा
जिस रिसर्चर को ये डेटा मिला उसका कहना है कि डेटा किसी थर्ड पार्टी से जुड़ा हो सकता है जो बैंकों को सेवाएं देता है। ये साफ नहीं है कि किस अवधि का डेटा लीक हुआ है। हालाँकि इसमें ज्यादातर 2010 से 2019 के बीच की डिटेल के शामिल होने की संभावना है। कुछ मामलों में कार्डधारकों की 2004 तक की जानकारी भी शामिल है। ये डेटा फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स से संबंधित है और ज्यादातर प्रोफेश्नल्स का है। इसलिए इसे काफी बड़ी गड़बड़ माना जा रहा है।
पीएम मोदी का डेटा भी हो चुका है लीक
यह पहली बार नहीं है जब भारत में बड़ी संख्या में लोगों की संवेदनशील जानकारी ऑनलाइन उजागर हुई है। अक्टूबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की निजी वेबसाइट का डेटा डार्क वेब पर सामने आया था। डेटा लीक में कथित तौर पर लाखों व्यक्तियों के नाम, ईमेल पते और मोबाइल नंबर शामिल थे। पिछले साल 1.3 मिलियन से अधिक भारतीय बैंकिंग ग्राहकों के डेबिट और क्रेडिट कार्ड डेटा को साइबर अपराधियों ने डार्क वेब पर बिक्री के लिए रखा था।
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