एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया, रिलायंस जियो, बीएसएनएल के ग्राहकों को जोरदार झटका लगा है। टेलीकॉम कंपनियां पूरी तरह घाटे में चल रही हैं।
नई दिल्ली: एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया, रिलायंस जियो, बीएसएनएल के ग्राहकों को जोरदार झटका लगा है। टेलीकॉम कंपनियां पूरी तरह घाटे में चल रही हैं। ऐसे में रिलायंस जियो समेत देश की दूसरी बड़ी टेलिकॉम कंपनियां जैसे वोडाफोन-आइडिया और एयरटेल अपने टैरिफ को महंगा करने वाली है। 1 दिसंबर से वोडाफोन-आइडिया और एयरटेल के बढ़े हुए टैरिफ लागू हो जाएंगे। जानकारी के मुताबिक बता दें दूरसंचार सेवा प्रदाताओं भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने अपनी सेवाओं की कीमतों में 30 प्रतिशत तक की वृद्धि की संभावना है।

वहीं सूत्रों ने बताया कि सर्किलों, योजनाओं और सेवाओं पर निर्भर करेगा, कीमतों में वृद्धि 8 से 10 प्रतिशत से शुरू होगी, वहीं कुछ चुनिंदा मामलों में, वृद्धि 25 से 30 प्रतिशत के बीच हो सकती है। बता दें कि समय के साथ बढ़ोतरी को तेज किया जा सकता है। कंपनियां यह सुनिश्चित करेंगी कि ग्राहक प्रतिस्पर्धी दरों पर सर्वोत्तम सेवाओं का लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और टियर -2 क्षेत्रों में टैरिफ बढ़ोतरी की संभावना कम है।
दिसंबर से कंपनियों ने लिया कॉल और डेटा शुल्क बढ़ाने का फैसला
वहीं वोडाफोन आइडिया ने कहा कि कंपनी ने केवल यह कहा है कि कीमतों को 1 दिसंबर से संशोधित किया जाएगा और संशोधन के विवरण के बारे में कोई संकेत नहीं दिया गया था। हालांकि इस संबंध में कंपनियों की तरफ से कुछ खास टिप्पणी नहीं दी गयी है। वहीं दूसरी तिमाही में बड़े नुकसान की रिपोर्ट करने के बाद, वोडाफोन आइडिया और भारती एयरटेल ने 19 नवंबर को घोषणा की कि उन्होंने संचालन की व्यवहार्यता के लिए दिसंबर से कॉल और डेटा शुल्क बढ़ाने का फैसला किया है।
वोडाफोन आइडिया वर्तमान में बिना डेटा के 24 रुपये की शुरुआती कीमत पर मासिक मोबाइल सेवाएं प्रदान करता है, जबकि डेटा के साथ कॉल सेवाएं 33 रुपये से शुरू होती हैं। बात करें एयरटेल की तो मासिक योजना 24 रुपये से शुरू होती है, जबकि डेटा के साथ योजनाएं 35 रुपये से शुरू होती हैं। वोडाफोन आइडिया ने Q2FY20 के लिए 50,921 करोड़ रुपये के समेकित शुद्ध नुकसान की सूचना दी- एक भारतीय कंपनी द्वारा रिपोर्ट की गई सबसे अधिक हानि। भारती एयरटेल ने 28,450 करोड़ रुपये का तिमाही घाटा उठाया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा AGC मामले में सरकार के पक्ष में फैसला सुनाए जाने के बाद अवैतनिक सरकार के बकाये के लिए दो फर्मों द्वारा निर्धारित प्रावधानों से उपजी हानियाँ।


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