नयी दिल्ली। भारती एयरटेल के चेयरमैन सुनील मित्तल का कहना है कि समय के साथ प्रति उपभोक्ता औसत टैरिफ को 300 रुपये या 4 डॉलर तक बढ़ाये जाने की जरूरत है। मित्तल के मुताबिक इंडस्ट्री का एआरपीयू यानी प्रति ग्राहक औसत आमदनी को 300 रुपये तक बढ़ाया चाहिए। मित्तल का कहना है कि 300 रुपये तक औसत टैरिफ बढ़ाये जाने के बावजूद भी यह दुनिया में सबसे कम चार्जेस होंगे। मित्तल ने टैरिफ बढ़ाये जाने के मामले में टेलीकॉम रेगुलेटर ट्राई से भी दखल देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि 300 रुपये पर भी यह चार्जेस दुनिया में सबसे कम होंगे, मगर इससे भारतीय टेलीकॉम इंडस्ट्री की वित्तीय स्थिति में सुधार होगा। वित्तीय दवाब के चलते कुछ दिन पहले ही तीनों प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों ने अपने मोबाइल टैरिफ बढ़ाये हैं। इनमें अपने प्लानों पर जियो ने 40 फीसदी, जबकि एयरटेल और वोडाफोन ने 42-42 फीसदी तक की बढ़ोतरी की है।
ग्राहक हितों और वित्तीय संसाधनों के बीच बैलेंस की जरूरत
मित्तल ने कहा कि निवेश के लिए आवश्यक उपभोक्ता हित और वित्तीय संसाधनों के बीच एक संतुलन की जरूरत है, जिसके लिए ट्राई को हस्तक्षेप करने और एक फ्लोर प्राइस निर्धारित करने की आवश्यकता है। मित्तल ने यह बातें हाल ही में कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल से मुलाकात के बाद कही हैं। गोयल के साथ मुलाकात में उन्होंने टेलीकॉम इंडस्ट्री पर 37,000 करोड़ रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट का भी मुद्दा उठाया। मित्तल के मुताबिक भारतीय उपभोक्ता बहुत कम रेट पर आनंद ले रहे हैं, ऐसे में इंडस्ट्री की निवेश की आवश्यकता को संतुलित करना जरूरी है।
टेलीकॉम कंपनियों पर एजीआर का दबाव
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि टेलीकॉम कंपनियों, खास कर एयरटेल और वोडाफोन पर, एजीआर का भुगतान समय पर करने का भी दवाव है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों को एजीआर यानी एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू का बकाया चुकाने को कहा है। इनमें वोडाफोन आइडिया पर 53,039 करोड़ रुपये और एयरटेल पर 35,586 करोड़ रुपये का बकाया है। इसी के लिए प्रोविजन बनाने की वजह से इन दोनों कंपनियों को जुलाई-सितंबर तिमाही जबरदस्त घाटा हुआ। जानकारों का मानना है कि ट्राई अगर टेलीकॉम सेक्टर को सहायता देने के लिए कुछ कदम उठाये तो टेलीकॉम कंपनियों को बकाया चुकाने और पूँजीगत खर्चों के लिए निवेश प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।
नयी तकनीक के लिए चाहिए पैसा
मित्तल के मुताबिक टेलीकॉम इंडस्ट्री को नयी टेक्नोलॉजीज, जिसमें 5जी शामिल है, के लिए फंड की जरूरत है। 5जी के लिए अगले साल ऑक्शन होगा। उन्होंने कहा कि हमें डिजिटल इंडिया का लाभ लेना है जो बिना टेलीकॉम सेक्टर के नहीं हो सकता। इस बीच एयरटेल इक्विटी और डेब्ट के जरिये 3 अरब डॉलर जुटाने की तैयारी में है। एयरटेल ने फैसला एजीआर चुकाने के लिए लिया है।
यह भी पढ़ें - रिलायंस जियो : पुराने प्लान रिचार्ज करवाने का यह है तरीका
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