Ethanol And Sugar Company News In Hindi: आपकी जानकारी के लिए बता दे की यह खबर खास तौर पर चीनी और एथेनॉल कंपनियों को प्रभावित करेगी और उनके लिए बेहतर भी मानी जा रही है। भारत के वित्त मंत्रालय द्वारा एक नोटिफिकेशन जारी किया गया है, जिसमें यह बताया गया है कि आने वाली 18 जनवरी 2024 से जारी आदेश के अनुसार मोलासेस के एक्सपोर्ट पर 50 प्रतिशत तक की ड्यूटी लगाई जानी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमित शाह की अध्यक्षता वाले मंत्री समूह ने इस बात की सिफारिश की थी कि मोलासेस के एक्सपोर्ट पर ड्यूटी लगाई जाए। इथेनॉल की सप्लाई को सुनिश्चित करने के लिए भी सरकार के द्वारा यह फैसला लिया गया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत वैश्विक स्तर पर इथेनॉल सप्लाई करने वाला सबसे बड़ा देश है और यह करीब 25 प्रतिशत तक एथेनॉल की सप्लाई करता है।
भारत सरकार की नई नीतियों से एथेनॉल कंपनियों को काफी फायदा हो रहा है। ऐसा इसलिए भी है, क्योंकि सरकार ने नए साल पर पूरे देश में एथेनॉल पंप खोलने का ऐलान किया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एथेनॉल पंप खोलने के लिए भारत के केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने अनुमति भी दे दी है, जिससे इसका रास्ता एकदम साफ हो जाता है। आपको बताते चलें कि एथेनॉल पंप सबसे पहले इंडियन ऑयल कार्पोरेशन द्वारा खोले जाएंगे।

मीडिया के द्वारा मिल रही जानकारी के मुताबिक पहले स्टेज में करीब 300 एथेनॉल पंप खोलने की तैयारी की जा रही है।
केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने भी इस बात की जानकारी दी है। उन्होंने चीनी उद्योग को शुगर बाय प्रोडक्ट्स पर अपना ध्यान ज्यादा केंद्रित करने को कहा है। इसके अलावा एथेनॉल सप्लाई को मार्केट में पहुंचाने के लिए पंप खोलने का भी सजेशन दिया गया है।
आपको बता दें कि एथेनॉल को पेट्रोल और डीजल में मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे में भारत सरकार का लक्ष्य साल आने वाले साल 2030 तक 30 प्रतिशत तक एथेनॉल ब्लेडिंग पूरी करने का है।
वहीं आने वाले एक साल में मतलब 2025 तक सरकार के द्वारा 20 प्रतिशत तक ब्लेंडिंग हासिल करने का लक्ष्य रखा गयै है। आपको बता दें कि मशीनरी इंडस्ट्री से चर्चा के बाद अब भारी कंस्ट्रक्शन मशीन में भी एथेनॉल और फ्लेक्स ऑयल का इस्तेमाल करने की बात कही गई है। जिसके तहत बड़ी मशीनों को चलाने के लिए ब्लेंडेड फ्यूल का इस्तेमाल किया जाएगा।
भारत सरकार ने कुछ दिन पहले एथेनॉल बनाने के लिए चीनी के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। दरअसल यह रोक इसलिए लगाई गई थी, क्योंकि सरकार का अनुमान था कि इस फाइनेंशियल ईयर में चिनी की पैदावार पिछले साल के मुकाबले कम हो सकती है। ऐसे में अगर एथेनॉल बनाने के लिए चीनी का इस्तेमाल किया जाएगा, तो बाजार में चीनी की कमी हो जाएगी और इसकी कीमतों में भी जबरदस्त उछाल आ सकता है।
हालांकि बाद में सरकार ने इस रोक को हटा दिया था। उस समय एक्सपर्टेस की सलाह थी कि कॉर्न से भी एथेनॉल बनाया जा सकता है। फिलहाल सरकार मिलों को बी-हैवी मोलेसेस से एथेनॉल बनाने पर रोक लगा सकती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फिलहाल सरकार द्वारा सी-हैवी एथेनॉल पर कोई रोक नहीं लगाई गई है।
हालांकि इंडस्ट्री का कहना है कि बी-हैवी मोलेसेस से सी-हैवी मोलेसेस में स्विच करना इतना आसान नहीं होगा। आपको बताते चलें कि इंडियन शुगर मिल एसोसिएशन का कहना है कि 2024 मार्केटिंग ईयर में प्रोडक्शन में 8 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिल सकती है। इसके साथ ही ब्राजील में प्रोडक्शन बढ़ाने की उम्मीद जताई जा रही है जिससे रॉ शुगर की प्राइस में भी गिरावट देखने को मिल सकती है।
जैसा कि हमने आपके ऊपर भी बताया है कि इसके पहले भी कॉर्न जैसे ग्रेन से एथेनॉल बनाने की बात की जा रही है। तो अगर सरकार के द्वारा इथेनॉल पॉलिसी में कुछ भी चेंज किया जाता है, तो इसका सीधा फायदा ग्रेंस से एथेनॉल बनाने वाली कंपनी को मिल सकता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत को अक्टूबर से लेकर दिसंबर तक 900 करोड रुपए से ज्यादा के एथेनॉल के सप्लाई आर्डर मिल चुके हैं। सरकार द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक इस समय भारत में एथेनॉल प्रोडक्शन की कैपेसिटी 1346 लीटर की है और इतनी इथेनॉल से ईंधन में ब्लेंडिंग के लक्ष्य को बड़ी आसानी से पूरा किया जा सकता है।
जाहिर सी बात है कि पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंड करने से फ्यूल की खपत में करीब 20 से 30 प्रतिशत तक की कमी आएगी, अगर आप इसे सालाना आंकड़े के हिसाब से देखते हैं, इससे पेट्रोल और डीजल के अलावा पैसों की भी जबरदस्त बचत होगी। साथ ही एथेनॉल ब्लेंडिंग के बाद देश में पेट्रोल और डीजल की खपत में कमी जरूर देखने को मिल सकती है।
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