नई दिल्ली, जुलाई 17। आज से कई घरेलू खाने-पीने के आइटम महंगे होने जा रहे हैं। इसके पीछे कारण है जीएसटी। पिछले महीने चंडीगढ़ में 47वीं वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की बैठक हुई थी। उसमें कई वस्तुओं के लिए जीएसटी दरों में बढ़ोतरी का फैसला लिया गया था। बढ़ी हुई नयी दरें सोमवार 18 जुलाई से लागू हो जाएंगी। इसलिए होटल और बैंक सेवाओं सहित कई घरेलू सामान भी महंगे हो जाएंगे। आम आदमी को दिन-प्रतिदिन के लिए इस्तेमाल होने वाले सामान के लिए अधिक पैसे देने होंगे। इससे किसी का भी किचन बजट और बढ़ जाएगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दही, लस्सी, छाछ, पनीर, गेहूं और चावल जैसे प्रोडक्ट, जो पहले से पैक और लेबल के साथ आते हैं, उन पर 18 जुलाई से 5 फीसदी जीएसटी लगेगा। इससे ये तमाम चीजें महंगी हो जाएंगी।
आटा और दाल भी महंगे होंगे महंगे
प्री-पैकेज्ड और प्री लेबल आटा और दाल पर भी कल से 5 फीसदी जीएसटी लगने जा रहा है। इससे जाहिर है कि इन उत्पादों के दाम भी बढ़ेंगे। हालांकि कृषि और डेयरी उत्पादों में, यदि खुले या ग्राहकों के सामने पैक किए गए बेचे जाते हैं, तो जीएसटी नहीं लगेगा। यानी पहले से पैक्ड उत्पाद ही नये जीएसटी रेट के तहत आएंगे। पहले केवल ब्रांडेड पैकेज्ड चावल ही जीएसटी के दायरे में आते थे। मगर अब, सभी नॉन-ब्रांडेड, पहले से पैक किए गए चावल, चावल का आटा और गेहूं का आटा भी जीएसटी के दायरे में आएंगे।
चेक करें पूरी लिस्ट
कल से दही, लस्सी, छाछ (5% जीएसटी), पनीर (5% जीएसटी), बेंत गुड़ (गुड़), पलमायरा गुड़ (5% जीएसटी) सहित सभी प्रकार का गुड़, खंडसरी चीनी (5% जीएसटी), प्राकृतिक शहद (5% जीएसटी), फूला हुआ चावल (मुरी), चपटा या पीटा चावल, (चिरा), सूखा चावल (खोई), चीनी के साथ लेपित चावल (मुरकी) (5% जीएसटी), चावल, गेहूं, राई, जौ, जई (5% जीएसटी), गेहूं और मेसलिन आटा (5% जीएसटी), निविदा नारियल पानी (12% जीएसटी) और चावल का आटा (5% जीएसटी) महंगे हो सकते हैं।
ये चीजें भी होंगी महंगी
एलईडी लैंप, स्याही, चाकू, ब्लेड, पेंसिल शार्पनर, ब्लेड, चम्मच, कांटे, करछुल, स्किमर्स, केक सर्वर, मुद्रण, लेखन और ड्रॉइंग स्याही, फिक्स्चर और उनके मेटल प्रिंटेड सर्किट्स बोर्ड पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगेगा। सोलर वॉटर हीटर और सिस्टम पर 12%, चमड़ा (तैयार, चामोइस और संरचना) पर 12%, सभी प्रकार के मुद्रित मानचित्र और चार्ट पर 12%, प्रति दिन 1,000 रुपये तक की कीमत वाले होटल आवास पर 12%, कमरे का किराया, आईसीयू को छोड़कर, एक अस्पताल द्वारा प्रति दिन 5,000 रुपये से अधिक का शुल्क लिया जाता है, तो उस पर 5% टैक्स लगाया जाएगा।
सड़कें, पुल, रेलवे और मेट्रो
सड़कों, पुलों, रेलवे, मेट्रो, एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, श्मशान व अन्य के लिए काम के ठेके पर 18% टैक्स लगेगा। ऐतिहासिक स्मारकों, नहरों, बांधों, पाइपलाइनों, जलापूर्ति के लिए संयंत्रों, शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों आदि के लिए केंद्र, राज्य सरकारों और स्थानीय प्राधिकरणों और उसके उप-ठेकेदारों को आपूर्ति किए गए वर्क कॉन्ट्रैक्ट पर 18% जीएसटी लगेगा।
क्या है जीएसटी
जीएसटी केंद्र सरकार द्वारा लगाया जाने वाला सिंगल, इंडायरेक्ट टैक्स है। जीएसटी 1 जुलाई, 2017 को शुरू किया गया था, और राज्यों को जीएसटी रोलआउट के कारण जनरेट होने वाले राजस्व नुकसान के लिए जून 2022 तक मुआवजे का आश्वासन दिया गया था। इस अवधि को अब बढ़ा दिया गया है।
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