नयी दिल्ली। 2014 में मोदी सरकार ने आने के बाद से देश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर काफी ध्यान दिया है। भारत ने इस मामले में वैश्विक स्तर पर साल दर साल अपनी रैंकिंग में सुधार किया है। इसी का नतीजा है कि अब भारत में नई कंपनियों की शुरुआत 7 सालों के हाई लेवल पर पहुंच गई है। भारत में कारोबार को लेकर हालात कैसे हैं इस पर सामने आए ताजा आंकड़े मौजूदा हालात की पुष्टि करते हैं। कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार जुलाई में 16,487 नई कंपनियों की शुरुआत हुई। यानी हर दिन करीब 530 नई कंपनियों ने रजिस्ट्रेशन कराया, जो पिछले 7 सालों में सबसे अधिक है। अधिकारियों ने कहा कि अगस्त में नए कंपनियों के रजिस्ट्रेशन में बढ़ोतरी जारी है। अधिकारियों के अनुसार अगस्त के महीने में न केवल कंपनियों बल्कि एलएलपी की फाइलिंग भी बढ़ रही है।
बिजनेस गतिविधियों में हो रहा सुधार
एक अन्य वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि स्पष्ट रूप से कोरोना को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के बाद कारोबारी गतिविधियों में बढ़ोतरी का संकेत है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार नए कंपनी रजिस्ट्रेशन अप्रैल में 3,209 के निचले स्तर पर पहुंच गए थे। उस पूरे महीने में लॉकडाउन रहा था, जिसकी शुरुआत 25 मार्च को हुई थी। इसके बाद मई में 4,835 से जून में ये आंकड़ा 10,954 पर दोगुना से अधिक दर्ज किया गया। इस बढ़ोतरी के पीछे ऑनलाइन नाम रजिस्ट्रेशन के लिए शुरू किए गए SPICe+ फॉर्म जैसे कदम हैं। वहीं फरवरी में एमसीए21 प्लेटफॉर्म के जरिए कंपनी रजिस्ट्रेशन शुरू की गई थी।
1 दिन में होता है काम
किसी कंपनी को शुरू करने के लिए सिर्फ 1 दिन लगता है। इसके लिए शर्त ये है कि सभी दस्तावेज सही से पेश किए जाएं। अधिकारियों के अनुसार ये एक ग्लोबल बेंचमार्क है। एक वर्ष में औसतन लगभग 120,000 कंपनियां रजिस्टर्ड होती हैं। इसमें 2014 से काफी सुधार हुआ, जब वार्षिक औसत 64,500 कंपनियों का था। हालांकि भारत को अभी भी 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिए इन आंकड़ों को दोगुना करने की आवश्यकता है।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की दिश में बड़ा कदम
5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य की दिशा में काम करने और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को और बेहतर बनाने के लिए मंत्रालय अगले साल सितंबर में एमसीए21 का वर्जन 3.0 लॉन्च करेगा। तीसरा चरण डेटा एनालिटिक्स के बारे में होगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग को एमसीए 21 रजिस्ट्री के विशाल भंडार में शामिल किया जाएगा। इससे अनुपालन में आसानी होगी। एक अधिकारी के मुताबिक रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के माध्यम से ई-एडज्यूडेशन सुविधाओं को उपलब्ध कराया जाएगा। मंत्रालय यह पहचान करने के लिए तकनीक का उपयोग करने पर विचार कर रहा है कि कोई कंपनी अपने भुगतान दायित्वों पर कब चूक सकती है।


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