बैंकों से भारी-भरकम कर्ज लेकर जानबूझ कर न चुकाने वाले यानी विलफुल डिफॉल्टर की संख्या बढ़ती जा रही है। इस वजह से बैंकों का घाटा भी बेतहाशा बढ़ रहा है।
नई दिल्ली: बैंकों से भारी-भरकम कर्ज लेकर जानबूझ कर न चुकाने वाले यानी विलफुल डिफॉल्टर की संख्या बढ़ती जा रही है। इस वजह से बैंकों का घाटा भी बेतहाशा बढ़ रहा है। मार्च, 2020 तक बैंकों को ऐसे विलफुल डिफॉल्टर के 62 हजार करोड़ रुपये बट्टे खाते में डालना पड़ा है। जानकारी दें कि लोन को बट्टे-खाते में डालने का मतलब लोन माफी बिल्कुल नहीं है। इसके जरिए बैंकों को अपनी बैलेंस शीट को साफ-सुथरी बनाए रखने में मदद मिलती है।

मार्च 2020 तक बैंकों ने टॉप-100 विलफुल डिफॉल्टर्स के 62 हजार करोड़ रुपए के लोन को राइट ऑफ में डाल दिया है। इस बात की जानकारी सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने दी है। डिफॉल्टर्स में पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) कथित धोखाधड़ी मामले में मुख्य आरोपी मेहुल चोकसी की कंपनी गीतांजलि जेम्स टॉप पर है।
गीतांजलि जेम्स का 5071 करोड़ का लोन एनबीए बन गया है, इसमें से बैंकों ने 622 करोड़ रुपये का लोन बट्टे-खाते में डाल दिया है। वहीं, विजय माल्या की कंपनी किंगफिशर एयरलाइंस के लोन को भी इस कैटेगरी में शामिल किया गया है। ये खबर ऐसे समय में आई है जब हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मेहुल चौकसी की करोड़ों की संपत्ति कुर्क की है। ईडी ने मेहुल चोकसी की 14 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क की है। यह कथित धोखाधड़ी मामला 13,000 करोड़ रुपये से अधिक का है।
धन शोधन रोधी कानून के तहत कुर्क की गई संपत्ति में मुंबई के गोरेगांव इलाके में ओ2 टावर स्थित 1,460 वर्ग फुट आकार का एक फ्लैट, सोने एवं प्लेटिनम के आभूषण, हीरे, चांदी एवं मोतियों के नेकलेस, घड़ियां और एक मर्सिडीज बेंज कार शामिल हैं। गीतांजलि समूह की कंपनियों और इसके निदेशक मेहुल चोकसी के नाम से मौजूद 14.45 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्ति कुर्क करने का एक अस्थायी आदेश धन शोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) के तहत जारी किया गया था।


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