नयी दिल्ली। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू), नौ यूनियनों का एक मुख्य समूह, ने दो सरकारी बैंकों के प्रस्तावित निजीकरण के खिलाफ मार्च में दो दिन की हड़ताल का ऐलान किया है। यूएफबीयू के अनुसार दो दिनों की ये हड़ताल 15 मार्च से शुरू होगी। 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विनिवेश योजना के तहत दो सरकारी बैंकों के निजीकरण की घोषणा की थी। सरकार 2019 में पहले ही आईडीबीआई बैंक को प्राइवेट कर चुकी है। इसके लिए एलआईसी को बैंक की ज्यादातर हिस्सेदारी बेची गयी है। साथ ही 14 सरकारी बैंकों का पिछले सालों में आपस में विलय कर दिया गया है।
सरकार के फैसले का विरोध
इंडिया टीवी की रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार को यूएफबीयू की एक बैठक के दौरान अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए) के महासचिव सी एच वेंकटचलम ने कहा कि बैंकों के निजीकरण के सरकार के फैसले का विरोध करने का निर्णय लिया गया है।
किन मुद्दों पर हुई चर्चा
बैठक में केंद्र सरकार के बजट में आईडीबीआई बैंक और दो अन्य बैंकों के निजीकरण, बैड बैंक की स्थापना, एलआईसी में विनिवेश, जनरल इंश्योरेंस कंपनी के निजीकरण, बीमा क्षेत्र में एफडीआई को 74 फीसदी तक बढ़ाने जैसे फैसलों पर चर्चा हुई। साथ ही तेजी से विनिवेश और सरकारी उपक्रमों की बिक्री पर भी चर्चा की गयी। उन्होंने कहा कि बैठक में तय पाया कि ये सभी उपाय सही नहीं हैं और इसलिए इनका विरोध करने की जरूरत है।
कौन-कौन है यूएफबीयू में शामिल
एआईबीओसी के महासचिव सौम्या दत्ता ने कहा कि विचार-विमर्श के बाद दो दिन (15 मार्च और 16 मार्च) को हड़ताल करने का निर्णय लिया गया है। यूएफबीयू के सदस्यों में ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन (एआईबीईए), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन (एआईबीओसी), नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ बैंक इम्प्लॉइज (एनसीबीई), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (एआईबीओए) और बैंक एंप्लॉयीज ऑफ इंडिया (बीईएफआई) शामिल हैं। इस संगठन में भारतीय राष्ट्रीय बैंक कर्मचारी महासंघ (आईएनबीईएफ), भारतीय राष्ट्रीय बैंक अधिकारी कांग्रेस (आईएनबीओसी), नेशनल बैंक ऑफ़ बैंक वर्कर्स (एनओबीडब्लू) और नेशनल ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ बैंक ऑफिसर्स (एनओबीओ) शामिल हैं।


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