नई दिल्ली, दिसंबर 16। कई मांगों को लेकर आज से बैंक कर्मचारियों ने देशव्यापी हड़ताल शुरू कर दी है। इन मांगों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्राइवेटाइजेशन का विरोध शामिल है। बैंक यूनियनों ने बताया है कि यह हड़ताल 17 दिसंबर 2021 तक चलेगी। इस बैंक हड़ताल का असर एसबीआई, पीएनबी और सेंट्रल बैंक जैसे सरकारी बैंकों पर पड़ेगा। वहीं इस हड़ताल से निजी बैंकों पर कोई असर नहीं होगा और वहां पर बैंकिंग सामान्य तरह से होती रहेगी। आशंका है कि इस हड़ताल से चेक क्लीयरेंस, फंड ट्रांसफर, डेबिट कार्ड से जुड़े काम ज्यादा प्रभावित होंगे।

ये है हड़ताली बैंक कर्मियों का कहना
ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कॉन्फेडरेशन के महासचिव संजय दास के अनुसार सरकार अपने फैसले में बदलाव नहीं करती है तो वह आगे भी अलग-अलग तरीकों से विरोध दर्ज कराएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार का यह फैसला ग्रामीण अर्थव्यवस्था की गहरी चोट पहुंचाने वाला है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन बैंकों के प्राइवेटाइजेशन का विरोध कर रहा है। इसी का विरोध करने के लिए 2 दिन की हड़ताल की जा रही है। अखिल भारतीय बैंक अधिकारी परिसंघ के महासचिव संजय दास ने कहा कि सरकारी बैंकों के निजीकरण से अर्थव्यवस्था के प्रॉयोरिटी सेक्टर को नुकसान होगा। इसके अलावा ग्रामीण अर्थव्यवस्था में क्रेडिट फ्लो और सेल्फ हेल्प ग्रुप को नुकसान होगा।
इन बैंकों पर पड़ेगा हड़ताल का असर
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अलावा पंजाब नेशनल बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने कहा है कि बैंक हड़ताल के कारण उनके कामकाज पर असर पड़ेगा। पीएनबी ने स्टॉक एक्सचेंज को जारी एक बयान में बताया है कि हड़ताल से निपटने के लिए इंतजाम किए गए हैं, लकिन फिर भी कामकाज पर असर पड़ सकता है। वहीं सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने कहा है कि उसने हड़ताल से निपटने के लिए सभी शाखाओं और दफ्तरों में सामान्य कामकाज के लिए मौजूदा गाइडलाइंस के सभी आवश्यक कदम उठाए हैं।


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