Bank Merger 2.0: देश में बचेंगे केवल 4 बैंक? मर्जर के क्या हैं फायदे; इकोनॉमी के लिए कितना असरदार? EXPLAINER

Bank Merger 2.0: किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में वहां के बैंकिंग सिस्टम का बहुत बड़ा रोल होता है। ऐसे में केंद्रीय बैंक समेत अन्य बैंकों की वित्तीय स्थिति में मजबूती होना बहुत जरूरी है। पिछले कुछ साल में देश के बैंकों की आर्थिक मजबूती के लिए केंद्र सरकार की ओर से कई कदम उठाए हैं और अब इस दिशा में एक और कदम उठाए जाने की चर्चा जोरों पर है।

Bank Merger 2 0

दरअसल, बैंकों को एक बार फिर से मर्ज किए जाने की अटकलें तेज हो गई हैं और ऐसा इसलिए क्योंकि हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक बयान में इस ओर इशारा किया है। यानी बैंक मर्जर 2.0 की तैयारी चल रही है। यदि ऐसा होता है तो संभवत: देश में केवल चार बड़े बैंक रह जाएंगे। देश में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), केनरा बैंक (Canara Bank), पंजाब नेशनल बैंक (PNB Bank) और बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda)को छोड़कर बाकी बैंकों का विलय किया जा सकता है।

ऐसे में आइए समझते हैं कि बैंक का मर्जर क्यों जरूरी है और ऐसा करने से देश की अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर होगा? बैंकों के मर्जर को लेकर क्या जोखिम और चुनौतियां हैं? साथ में जानते हैं कि इसके क्या फायदे हैं...

निर्मला सीतारमण ने क्या कहा?

वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा है कि देश को अब मजबूत, बड़े और भरोसेमंद सरकारी बैंकों की जरूरत है और इसके लिए पहले सरकार को बैंकों के साथ बैठकर बात करनी होगी और देखना होगा कि वे इसे कैसे आगे बढ़ाना चाहते हैं।

6 नवंबर को मुंबई में 12वें SBI बैंकिंग एंड इकोनॉमिक्स कॉनक्लेव को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा था, ''मेरे हां कहने से पहले बहुत से काम करने बाकी है। मैंने फैसला ले लिया है और इस दिशा में काम भी शुरू हो चुका है। हम रिजर्व बैंक के साथ भी इस पर बातचीत कर रहे हैं कि बड़े बैंक बनाने में उनका विचार क्या है?''

Bank Merger 2.0 के तहत किन बैंकों के मर्जर का प्लान?

पीटीआई के मुताबिक, बैंकों के मर्जर प्लान के दूसरे चरण में इंडियन ओवरसीज बैंक (आईओबी), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (सीबीआई), बैंक ऑफ इंडिया (बीओआई) और बैंक ऑफ महाराष्ट्र (बीओएम) को पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी), बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) जैसे बड़े बैंकों के साथ मिलाया जा सकता है।

Bank Merger 1.0 में किन बैंकों का हुआ था विलय

सबसे पहले भारतीय स्टेट बैंक यानी SBI ने अपने 5 सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक को 2017 में मर्ज किया था। इसके बाद 2019 और 2020 में कई बैंकों का विलय हुआ था, जिसके बाद देश में सरकारी बैंकों की संख्या 2017 के 27 से घटकर अब 12 रह गई हैं।

साल मर्ज किए गए बैंक किस बैंक में हुआ मर्ज प्रकार
2017एसबीआई के 5 सहयोगी बैंक और भारतीय महिला बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI)सरकारी
2019विजया बैंक + देना बैंक बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB)सरकारी
2020ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स + यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया पंजाब नैशनल बैंक (PNB) सरकारी
2020 सिंडिकेट बैंक + कैनरा बैंक कैनरा बैंक सरकारी
2020 इलाहाबाद बैंक + इंडियन बैंक इंडियन बैंक सरकारी
2020 आंध्रा बैंक + कॉर्पोरेशन बैंक यूनियन बैंक ऑफ इंडिया सरकारी

बैंकों के मर्ज के फायदे

1. मजबूत पूंजी और वित्तीय स्थिरता - मर्ज के बाद बैंक की पूंजी और बैलेंस शीट बड़ी होती है, जिससे वो बड़े ऋण (loan) देने में सक्षम होता है।
2. एनपीए (NPA) में कमी - मर्ज से संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है, जिससे खराब ऋणों (bad loans) को मैनेज करना आसान होता है।
3. तकनीकी सुधार और डिजिटल सेवा विस्तार - मर्ज बैंक अधिक निवेश कर सकते हैं डिजिटल बैंकिंग, मोबाइल ऐप और सुरक्षा में।
4. वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सुधार - बड़े बैंक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।
5. संचालन लागत में कमी (Operational Efficiency) - समान शाखाओं और कर्मचारियों के एकीकरण से खर्च घटता है।
6. ग्राहकों को एक ही बैंक में अधिक सुविधाएं - ग्राहकों को अधिक नेटवर्क, ATM, और सेवाएं एक जगह मिलती हैं।

चुनौतियां और जोखिम

  • संस्कृति और सिस्टम का एकीकरण यानी इंटीग्रेशन कठिन - अलग-अलग बैंकिंग सिस्टम और नीतियां मिलाने में समय लगता है।
  • कर्मचारियों की असंतुष्टि - पद और जिम्मेदारी बदलने से कर्मचारियों में असंतोष हो सकता है।
  • ग्राहकों को अस्थायी परेशानी - खाता नंबर, IFSC कोड आदि बदलने से शुरुआती दिक्कतें होती हैं।

भारत की अर्थव्यवस्था पर इसका असर

  • बैंकिंग सेक्टर की मजबूती - अब भारत में कुछ बड़े "मेगा बैंक" बने हैं जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।
  • निवेश और ऋण क्षमता में वृद्धि - उद्योगों, इंफ्रास्ट्रक्चर, MSME को बड़े कर्ज आसानी से मिल पाते हैं।
  • सरकार पर वित्तीय बोझ कम - कमजोर बैंकों को बार-बार पूंजी देने की जरूरत घटती है।
  • GDP ग्रोथ को सपोर्ट - मजबूत बैंकिंग सेक्टर से निवेश बढ़ता है, जिससे GDP में सुधार आता है।
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लाभ - विलय से शाखा नेटवर्क बढ़ता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी फंड फ्लो बढ़ता है।

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