नई दिल्ली, सितंबर 30। आभूषण और संपत्ति के कागजात को सुरक्षित रखने के लिए लोग अक्सर बैंक के लॉकर का प्रयोग करते हैं। पिछले साल भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंक लॉकर से संबंधित नियमों में बदलाव किया था, नए नियम जनवरी 2022 से प्रभावी हैं। बैंक लॉकर के बदले गए नियमों का प्राथमिक उद्देश्य है कि लोगों के कीमती समानों को सुरक्षित रखा जा सके।
ईमेल और एसएमएस से मिलेगी जानकारी
हर बार जब भी आप लॉकर को एक्सेस करेंगे तब आपको बैंक ई-मेल और एसएमएस के माध्यम से सूचित किया जाएगा। इस नियम का उद्देश्य धोखाधड़ी पर रोकथाम लगाना है। साथ ही, बैंक एक लॉकर को अधिकतम तीन साल की अवधि के लिए किराए दे सकता है। उदाहरण के लिए यदि लॉकर का किराया 2000 रुपये है तो बैंक को अन्य रखरखाव शुल्कों को छोड़कर, आपसे 6000 रुपये से अधिक शुल्क नहीं लेना होगा।
आरबीआई ने लॉकर रूम में आने-जाने वाले लोगों पर सीसीटीवी कैमरे से नजर रखना बिल्कुल अनिवार्य कर दिया है। साथ ही बैंकों को निर्देश दिया गया है कि सीसीटीवी फुटेज का डाटा छह महीने तक स्टोर करना होगा। सुरक्षा में चूक या चोरी की स्थिति में पुलिस सीसीटीवी फुटेज के जरिए जांच कर सकेगी।
मुआवजे का है प्रावधान
पहले लॉकर से सामान चोरी होने के लिए बैंक जिम्मेदार नहीं होते थे। कोई भी उनसे वित्तीय नुकसान का दावा नहीं कर सकता था। अब, आरबीआई के गाइडलाइन के अनुसार, ग्राहक के बैंक लॉकर से कोई मूल्यवान वस्तु चोरी होने पर व्यक्ति मुआवजे का हकदार होगा। बैंकों को मुआवजे के लिए ग्राहक को सालाना लॉकर किराए का 100 गुना तक देना पड़ सकता है।
पारदर्शिता
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में पारदर्शिता की कमी हमेशा से एक चिंता का विषय रही है। आज तक बैंक चोरी की घटनाओं को यह कहकर टाल देते थे कि वह इसके लिए जिम्मेदार नहीं हैं। आरबीआई के मुताबिक बैंक को अपने आदेश में बैंकों को खाली लॉकरों की सूची और लॉकर की प्रतीक्षा सूची का विवरण देना होगा। बैंक तीन साल से अधिक का अग्रीम किराया नहीं ले सकते हैं।


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