बांग्लादेश की पूर्व PM शेख हसीना को फांसी की सजा; मानवता के खिलाफ 5 अपराधों में से 3 में दोषी करार

Bangladesh Ex PM Sheikh Hasina: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के खिलाफ किए गए पांच अपराधों में से तीन में दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई गई है। ढाका स्थित इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने फांसी की सजा का ऐलान किया।

sheikh hasina

हसीना के खिलाफ आए इस फैसले के बाद से पूरे देश में हिंसा का माहौल बना हुआ है। सरकार ने स्थिति को देखते हुए हाई अलर्ट जारी कर दिया है। ढाका में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए 15,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। इन सुरक्षाकर्मियों को हिंसक प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने तक के आदेश दिए गए हैं।

शनिवार देर रात से रविवार सुबह तक, ढाका में दो बसों में आग लगाने की घटना सामने आई है। इस फैसले के बाद हिंसा और अधिक बढ़ने की आशंका के चलते पूरे बांग्लादेश में सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है।

2 मामलों में सुनाई गई मौत की सजा

शेख हसीना को हत्या के दो गंभीर आरोपों में मौत की सज़ा सुनाई गई है। अदालत ने उन्हें हत्या के लिए उकसाने और सीधे तौर पर हत्या का आदेश देने का दोषी पाया है। इस मामले में दूसरे आरोपी, पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान को भी 12 लोगों की हत्या का दोषी ठहराया गया है, जिसके लिए उन्हें फांसी की सज़ा मिली है।

दूसरी ओर, तीसरे आरोपी और पूर्व आईजीपी अब्दुल्ला अल-ममून को पांच साल जेल की सज़ा सुनाई गई है। गौरतलब है कि ममून इस केस में सरकारी गवाह बन गए थे। न्यायालय ने शेख हसीना और असदुज्जमां कमाल की बांग्लादेश स्थित सभी संपत्तियों को ज़ब्त करने का आदेश दिया है। ये दोनों आरोपी इस समय फरार चल रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, हसीना और असदुज्जमां पिछले 15 महीनों से भारत में रह रहे हैं।

शेख हसीना पर लगे हैं 5 बड़े आरोप

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनके सहयोगियों पर गंभीर आरोप लगे हैं। उन पर पांच मुख्य आरोप लगाए गए हैं, जिनमें हत्या, हत्या का प्रयास, और यातना जैसे अपराध शामिल हैं। इन आरोपों के दायरे में कई हिंसक घटनाएँ और सरकारी दमन की कार्रवाइयाँ आती हैं।

पहला आरोप -: हत्या, हत्या के प्रयास और यातना से संबंधित है। चार्जशीट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि हसीना ने पुलिस और अवामी लीग से जुड़े सशस्त्र समूहों को आम नागरिकों पर हमला करने के लिए उकसाया। इतना ही नहीं, उन्होंने हिंसा को बढ़ावा दिया और इसे रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।

दूसरा आरोप -: यह है कि हसीना ने छात्र प्रदर्शनकारियों को कुचलने के लिए घातक हथियारों, हेलीकॉप्टरों और ड्रोन का इस्तेमाल करने का सीधा आदेश दिया था। यह आदेश बड़े पैमाने पर दमन का कारण बना, जिससे कई छात्रों को गंभीर नुकसान हुआ।

तीसरा आरोप -: 16 जुलाई को बेगम रौकेया विश्वविद्यालय के छात्र अबू सैयद की हत्या से जुड़ा है। आरोपपत्र के अनुसार, हसीना और अन्य सहयोगियों ने इस हत्या का आदेश दिया, इसके लिए साजिश रची और इस अपराध में सक्रिय रूप से शामिल रहे।

चौथा आरोप -: 5 अगस्त को ढाका के चांखारपुल में छह निहत्थे प्रदर्शनकारियों की हत्या से संबंधित है। यह दावा किया गया है कि ये हत्याएँ हसीना के सीधे आदेश, उकसावे, मदद और उनकी साजिश का परिणाम थीं।

पांचवां आरोप -: पांच प्रदर्शनकारियों को गोली मारकर हत्या कर दी गई और एक अन्य को घायल किया गया। सबसे वीभत्स बात यह है कि मारे गए पाँच लोगों के शवों को जला दिया गया था, जबकि एक प्रदर्शनकारी को तो ज़िंदा ही जला दिया गया।

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