Bajaj Finance Share Price: बजाज फाइनेंस के शेयर्स में आज जोरदार तेजी देखने को मिल रही है। बीएसई पर बजाज फाइनेंस के शेयर्स सुबह 10 बजे 2.84% की तेजी के साथ 936 रुपये पर ट्रेड कर रहे हैं। इसके अलावा बजाज हाउसिंग फाइनेंस के शेयर्स में भी आज उछाल देखने को मिल रहा है। बजाज हाउसिंग फाइनेंस के शेयर्स में सुबह 1.53% की तेजी देखने को मिल रही है और 123 रुपये पर ट्रेड कर रहे हैं। बजाज फाइनेंस लिमिटेड के शेयरों में तेजी आने के पीछे की वजह कंपनी की मजबूत तिमाही रिपोर्ट रही है।

बजाज फाइनेंस का Q1 रिजल्ट
कंपनी के कंज्यूमर तेजी से बढ़ रहे हैं। 30 जून 2025 तक बजाज फाइनेंस के कुल कंज्यूमर 10.65 करोड़ तक पहुंच गए हैं, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 21% ज्यादा है। एक साल पहले, यानी 30 जून 2024 को कंपनी के 8.81 करोड़ कंज्यूमर थे। सिर्फ अप्रैल से जून 2025 की पहली तिमाही में ही कंपनी ने 46.9 लाख नए ग्राहक जोड़े हैं, जो यह दिखाता है कि कंपनी की ग्रोथ बहुत तेज रफ्तार से हो रहा है।
बजाज फाइनेंस ने अप्रैल से जून 2025 की पहली तिमाही में कुल 1.34 करोड़ नए लोन दिए हैं। ये आंकड़ा पिछले साल इसी तिमाही के मुकाबले 23% ज्यादा है। पिछले साल पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून 2024 में कंपनी ने 1.09 करोड़ लोन दिए थे।
AUM में जोरदार बढ़त
कंपनी का AUM यानी एसेट्स अंडर मैनेजमेंट भी अच्छा बढ़ा है। 30 जून 2025 तक यह करीब ₹4.41 लाख करोड़ पर पहुंच गया, जो पिछले साल 30 जून 2024 को ₹3.54 लाख करोड़ था। इस तरह AUM में 25% की बढ़त दर्ज हुई है। सिर्फ Q1 FY26 में ही कंपनी का AUM करीब ₹24,750 करोड़ बढ़ा है।
कंपनी की डिपॉजिट बुक में भी अच्छा सुधार देखने को मिला है। डिपॉजिट्स में 15% की बढ़त दर्ज की गई है। 30 जून 2025 तक कंपनी की डिपॉजिट बुक ₹72,100 करोड़ पर पहुंच गई, जबकि पिछले साल इसी समय यह ₹62,774 करोड़ थी। कुल मिलाकर कंपनी ने नए वित्त वर्ष की शुरुआत दमदार की है।
मोतीलाल ओसवाल ने दी ये जानकारी
मोतीलाल फाइनेंशियल फाइनेंशियल सर्विसेज की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, बजाज फाइनेंस के लिए कैपिटल मार्केट प्राइस 910 रुपये और न्यूट्रल स्टांस बताया है। ब्रोकरेज फर्म के अनुसार, कंपनी के कई आंकड़े मजबूत रहे, लेकिन डिपॉजिट ग्रोथ थोड़ी धीमी नजर आई। सालाना आधार पर डिपॉजिट्स में 15% की ग्रोथ रही, जबकि तिमाही आधार (QoQ) पर सिर्फ 1% की बढ़त दर्ज हुई और डिपॉजिट बुक ₹72,100 करोड़ तक पहुंची।
जानकारों के मुताबिक इसकी वजह यह हो सकती है कि कंपनी ने इस बार डिपॉजिट्स को ज्यादा तरजीह नहीं दी, बल्कि बैंकों से कर्ज लेकर अपनी जरूरतें पूरी कीं। बैंक आमतौर पर फ्लोटिंग रेट पर लोन देते हैं, जिसका फायदा कंपनी को ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव के हिसाब से मिल सकता है।


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