नयी दिल्ली। जॉब डेटा के शुरुआती अनुमान बताते हैं कि कोरोनावायरस महामारी के कारण बेरोजगारी दर 23.4 प्रतिशत पर पहुंच गई है। इस बात का खुलासा भारतीय अर्थव्यवस्था निगरानी केंद्र (सीएमआईई) ने की है। सीएमआईई, जो कि एक व्यापार सूचना कंपनी है, साप्ताहिक आधार पर बेरोजगारी के आंकड़ों को ट्रैक करती है। इसके अनुमानों के मुताबिक 22 मार्च को समाप्त सप्ताह में बेरोजगारी दर 8.4 प्रतिशत हो गई थी, जबकि 5 अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह के अनुसार बेरोजगारी दर उछल कर 23.4 फीसदी पर पहुंच गई। बता दें कि बेरोजगारी में इतनी बढ़ोतरी लॉकडाउन के दौरान दर्ज की गई है। कोरोनावायरस को फैलने से रोकने के लिए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन 24 मार्च से शुरू हुआ। कई राज्यों ने राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन तालाबंदी की घोषणा से पहले ही कुछ जिलों में लॉकडाउन कर दिया था।

मार्च के अंतिम सप्ताह में बढ़ी बेरोजगारी
सीएमआईई के आंकड़ों के अनुसार 29 मार्च को समाप्त हुए सप्ताह में बेरोजगारी दर 23.8 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। वहीं इसके उलट मार्च 2020 में भारत की रोजगार दर 38.2 प्रतिशत के निचले स्तर तक गिर गई। इसे सीएमआईई ने "प्रारंभिक गिरावट" कहा है। सीएमआईई ने रोजगार दर पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ये गिरावट जनवरी 2020 के बाद सबसे भारी गिरावट है। ऐसा लगता है कि पिछले दो वर्षों में स्थिर रहने के लिए संघर्ष करने के बाद इसने मार्च में एक जोरदार डुबकी लगाई है।
करीब 5 करोड़ लोग हुए बेरोजगार
मिंट में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार भारत के पूर्व प्रमुख सांख्यिकीविद् प्रोणब सेन का अनुमान है कि लॉकडाउन शुरू होने के दो सप्ताह बाद लगभग 5 करोड़ लोगों ने अपनी नौकरी खो दी। सेन के मुताबिक कुछ लोगों को अभी के लिए घर भेजा गया है, इसलिए बेरोजगारी का वास्तविक दायरा और भी अधिक हो सकता है, जो कि कुछ समय बाद दिखाई दे सकता है। वहीं दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के एसोसिएट प्रोफेसर हिमांशु का कहना है कि यह (बेरोजगारी आंकड़े) कुछ हद तक अपेक्षित हैं।


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