नयी दिल्ली, अप्रैल 12: आम जनता के लिए एक बुरी खबर आई है। खुदरा मुद्रास्फीति मार्च के महीने में बढ़ कर 5.53 फीसदी हो गई, जो फरवरी में 5.03 फीसदी थी। खाद्य महंगाई में उछाल से खुदरा महंगाई बढ़ी है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार फरवरी में 3.87 फीसदी के मुकाबले खाद्य महंगाई मार्च में 4.94 फीसदी हो गयी। इसी तरह फ्यूल एंड लाइट कैटेगरी में खुदरा महंगाई 3.53 फीसदी से बढ़ कर 4.50 फीसदी हो गयी। खाद्य कैटेगरी की महंगाई में मुख्य तौर पर ऑयल और फैट की कीमतों में बढ़ोतरी से इजाफा हुआ।

तीन महीनों में सबसे अधिक
खुदरा महंगाई मार्च में पिछले तीन महीनों में सबसे अधिक रही है। हालांकि अच्छी बात यह रही कि खुदरा महंगाई आरबीआई द्वारा तय किए गए दायरे में रही। आरबीआई की तरफ से अगले 5 साल के लिए खुदरा महंगाई को 4 फीसदी से 6 फीसदी के दायरे में रखने का लक्ष्य है। पिछले महीने मांस और मछली की महंगाई दर 15.09 फीसदी रही। नॉन-अल्कोहल पेय पदार्थों की कीमत में 14.41 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि दालों और उत्पादों के खंड में 13.25 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। इसी तरह अंडे की कीमतों में भी 10.60 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
औद्योगिक उत्पादन घटा
एक तरफ खुदरा महंगाई मार्च में बढ़ी, वहीं दूसरी तरफ औद्योगिक उत्पादन में भी गिरावट के आंकड़े सामने आए हैं। सरकार की तरफ से फरवरी के औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े घोषित किए गए हैं। फरवरी में औद्योगिक उत्पादन में 3.6 फीसदी की गिरावट आई, जबकि जनवरी में इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रिलयल प्रोडक्शन (औद्योगिक उत्पादन) 1.6 फीसदी लुढ़का था। वहीं फरवरी 2020 में इसमें 4.5 फीसदी का इजाफा हुआ था।
किस क्षेत्र में कितनी गिरावट
फरवरी में विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन 3.7 प्रतिशत बढ़ा, जबकि खनन उत्पादन में 5.5 प्रतिशत की गिरावट आई। इस बीच फरवरी में बिजली उत्पादन में 0.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई। औद्योगिक उत्पादन दिसंबर में 1.5 प्रतिशत बढ़ा था। यह 2020-21 वित्तीय वर्ष के पहले 11 महीनों में से 8 में गिरा। ताजा आंकड़ों के बाद भारत का औद्योगिक उत्पादन पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में अब वित्त वर्ष 2020-21 की अप्रैल-फरवरी अवधि में 11.3 प्रतिशत गिर गया है।


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