नई दिल्ली, मई 10। देश में कोरोना के मामले बढ़ने के साथ ही लोगों के रोजगार और नौकरियों पर आफत आ गयी है। देश के कई राज्यों में लॉकडाउन और प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिससे एक बार फिर से कारोबारों पर मुसीबत आ गयी है। इसके नतीजे में लोग बेरोजगार हो रहे हैं। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार पिछले महीने कुल 73.5 लाख बेरोजगार हो गए। भारतीय अर्थव्यवस्था निगरानी केंद्र (सीएमआईई) की रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल में 73.5 लाख लोगों को रोजगार से हाथ धोना पड़ा।

सैलेरी वालों पर मुसीबत
सीएमआईई की रिपोर्ट में बताया गया है कि 34 लाख वेतनभोगी (सैलेरी पाने वालों) भारतीयों ने अप्रैल में अपनी नौकरी खो दी। छोटे और मध्यम उद्यम एक बार फिर से अपने बचे रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यही 34 लाख वेतनभोगी अहम कारण है। असल में यह इंडस्ट्री कोरोना की पहली लहर से ही ठीक से नहीं उभर पाई थी कि देश दूसरी लहर की चपेट में आ गया।
बढ़ी बेरोजगारी दर
अप्रैल में बेरोजगारी दर बढ़ कर 7.97 प्रतिशत हो गई, जो मार्च में 6.5 प्रतिशत रही थी। सीएमआईई के प्रबंध निदेशक महेश व्यास ने कहा कि लॉकडाउन और आर्थिक मंदी ने ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्यमों को तबाह कर दिया है। उनके अनुसार पिछले साल अर्थव्यवस्था को एक बड़ा झटका लगा था। इससे पहले कि छोटे उद्योग उससे पूरी तरह से उभर पाते कोविड की दूसरी लहर ने फिर से एक और तगड़ा झटका दिया।
कितने लोगो के पास रोजगार
दिसंबर 2020 के अंत में भारत में 38.877 करोड़ लोग कार्यरत थे। ये संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों की कुल गिनती है। जनवरी-अंत तक यह संख्या बढ़कर 40.07 करोड़ हो गई थी, लेकिन फरवरी के अंत में यह 39.821 करोड़, मार्च तक 39.814 करोड़ और अप्रैल-अंत तक 39.079 करोड़ रह गई। ग्रामीण इलाकों में करीब 28.4 लाख वेतनभोगी बेरोजगार हो गए। जबकि शहरों में 5.6 लाख कर्मचारी नौकरी से हाथ धो बैठे। इससे वेतनभोगी कर्मचारियों की संख्या 4.6 करोड़ से घटकर अप्रैल में 4.544 करोड़ रह गई।


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