नयी दिल्ली। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (एफआईईओ) ने सरकार को बताया है कि तेजी से फैलती कोरोनावायरस महामारी के कारण लॉकडाउन के बीच भारत के निर्यात सेक्टर लगभग 1.5 लोग बेरोजगार हो सकते हैं। निर्यात सेक्टर को ऑर्डर रद्द होने के कारण दबाव का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते सेक्टर की तरफ से सरकार से एक आर्थिक पैकेज जारी करने का अनुरोध किया गया है। इतना ही नहीं एफआईईओ के अध्यक्ष शरद कुमार सराफ के मुताबिक निर्यात सेक्टर में 50 प्रतिशत तक ऑर्डर रद्द होने से इस क्षेत्र में एनपीए बढ़ने की भी उम्मीद है। इससे बैंकों पर दबाव बढ़ सकता है। एफआईईओ ने कहा है कि सरकार को निर्यातकों को कोविड-19 ब्याज मुक्त कार्यशील पूंजी टर्म लोन भी देने चाहिए ताकि मजदूरी, किराया और यूटिलिटी की लागत को कवर किया जा सके।

उत्पादन इकाइयों को मिले काम करने की अनुमति
एफआईईओ ने सरकार के सामने से सेक्टर से जुड़े कई उपाय और सुझाव रखे हैं। इनमें एक सुझाव यह भी है कि उत्पादन इकाइयों को अटके ऑर्डरों को पूरा करने के लिए न्यूनतम लेबर के साथ काम करने की अनुमति दी जानी चाहिए, वरना कई इकाइयों को आने वाले दिनों में भारी नुकसान होगा। हाल ही में विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) ने कहा था कि कोरोनावायरस के कारण 2020 में वैश्विक व्यापार में 13 से 31 प्रतिशत तक गिरावट की संभावना है। एफआईईओ ने सरकार को मार्च से मई तक 3 महीने के लिए ईपीएफओ और कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) फंड में भुगतान करने से छूट देने का भी अनुरोध किया।
इकोनॉमी को 100 अरब डॉलर का नुकसान
हाल ही में एक रेटिंग एजेंसी ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि कोरोवायरस के कारण 21 दिनों के लॉकडाउन के दौरान अर्थव्यवस्था को लगभग 100 अरब डॉलर का नुकसान होने की उम्मीद है। रिपोर्ट में कहा गया कि शटडाउन से रोज की लागत 4.5 अरब डॉलर से अधिक हो सकती है। ज्ञात हो कि मार्च के अंतिम सप्ताह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोनोवायरस को फैलने से रोकने के लिए 14 अप्रैल तक देश में तीन सप्ताह के पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा की थी।


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