Mutual Fund निवेशकों को झटका, डेब्ट स्कीमों पर अब नहीं मिलेगा टैक्स बेनेफिट
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Debt Mutual Fund : यदि आप भी म्यूचुअल फंड में निवेश करना पसंद करते हैं तो आपके लिए एक बुरी खबर है। दरअसल सरकार ने डेब्ट म्यूचुअल फंड और कुछ अन्य योजनाओं में निवेशकों के लिए इंडेक्सेशन लाभ को खत्म कर दिया है, जिससे इन योजनाओं का मिलने वाला टैक्स बेनेफिट अब नहीं मिलेगा। इस बेनेफिट की वजह से लोग बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) और चुनिंदा बीमा पॉलिसियों के मुकाबले डेब्ट फंड को चुनते थे। इंडेक्सेशन बेनिफिट्स के तहत, होल्डिंग अवधि (जितने दिन आपने निवेश बरकरार रखा) के दौरान महंगाई को एडजस्ट करने के बाद रिटर्न की कैल्कुलेशन की जाती है।

किसे मिलता है फायदा

किसे मिलता है फायदा

ये लाभ उन निवेशकों को मिलता है जो तीन साल से अधिक समय तक डेब्ट, गोल्ड स्कीम और हाइब्रिड स्कीमों की कुछ कैटेगरियों में निवेश करते हैं। सरकार के अनुसार डेब्ट फंड वे स्कीमें होती हैं जो अपने पोर्टफोलियो का 35 फीसदी से कम इक्विटी में रखती हैं। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि इस कदम से म्यूचुअल फंडों मार्केट को नुकसान होगा।

एनबीएफसी पर भी पड़ेगा असर

एनबीएफसी पर भी पड़ेगा असर

माना जा रहा है कि इन बदलावों से निश्चित रूप से ओवरऑल ईकोसिस्टम भी प्रभावित होगा, खास कर एनबीएफसी (नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी) सेक्टर। हालांकि जानकार मानते हैं कि डेब्ट फंड्स में निवेश करते समय केवल टैक्सेशन पर विचार नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसमें पुराने और पारंपरिक निवेश विकल्पों के मुकाबले अभी भी कई खास बेनेफिट मिलते हैं। एक जानकार ने सरकार के इस कदम को 'अनुचित टैक्स' करार दिया।

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अब कैसे लगेगा टैक्स

अब कैसे लगेगा टैक्स

अब इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कितने समय तक डेब्ट फंड में निवेश रखते हैं, या कब आप इसे बेचते हैं। आपको होने वाला लाभ उस साल (जिस साल आप बेचेंगे) में आपकी आय में जोड़ा जाएगा। इस तरह आप जिस भी इनकम टैक्स स्लैब में हैं, उसके हिसाब से टैक्स लगाया जाएगा। जानकार मानते हैं कि इंडेक्सेशन इंफ्लेशन एडजस्टमेंट है। यह कोई टैक्स छूट नहीं है, न ही यह सरकार की ओर से कोई तोहफा है। यह महंगाई के लिए एक मुआवजा है। जानकार अब मान रहे हैं कि डेब्ट फंड्स के लिए इंडेक्सेशन बेनिफिट्स को हटाने का ये कदम इन स्कीमों को निवेशकों के बीच कम लोकप्रिय बना सकता है। साथ ही इस बदलाव का एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (एएमसी) के रेवेन्यू और प्रॉफिट पर भी प्रभाव पड़ सकता है। इस समय फंड इंडस्ट्री के लगभग 40 लाख करोड़ रुपये की कुल एयूएम का लगभग 19% नॉन-लिक्विड डेब्ट योजनाओं में निवेश किया जाता है, जो सरकार के कदम से प्रभावित हो सकता है।

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