नयी दिल्ली। राष्ट्रीय मुनाफाखोरी निरोधक प्राधिकरण या एनएए ने बाबा रामदेव की पतंजलि पर 75 करोड़ रु का जुर्माना लगाया है। पतंजलि पर ये जुर्माना ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी करने के आरोप में लगा है। दरअसल पतंजलि ने कथित तौर पर नवंबर 2017 में घोषित की गयी गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) दरों में कटौती का लाभ उपभोक्ताओं को नहीं दिया। कुछ खास वस्तुओं पर टैक्स रेट कम होने से कंपनियों को उसी हिसाब से इसका फायदा ग्राहकों को पहुंचाना होता है, मगर पतंजलि ने ऐसा नहीं किया। बता दें कि एनएए पहले भी ऐसा ही जुर्माना कई अन्य कंपनियों पर भी लगा चुका है।
ब्याज सहित देना होगा जुर्माना
एनएए के आदेश के अनुसार, जो इसकी वेबसाइट पर उपलब्ध है, पतंजलि आयुर्वेद को तीन महीने के भीतर केंद्र और राज्य सरकारों के निर्दिष्ट उपभोक्ता कल्याण फंड में जु्र्माने की राशि जमा करनी है। साथ ही कंपनी को इस राशि पर 18 फीसदी ब्याज भी देने को कहा गया है। ब्याज की गणना नवंबर 2017 से ही की जायेगी। कंपनी की तरफ से फिलहाल इस मामले में कुछ नहीं गया है।
पतंजलि के खिलाफ जारी हुआ कारण बताओ नोटिस
किसी भी कंपनी द्वारा जीएसटी का फायदा ग्राहकों को पहुंचा कर मुनाफाखोरी करने पर एनएए उनसे मामले में पूछगछ करने के साथ साथ जुर्माना भी लगाता है। एनएए के आदेश में कहा गया है कि उसने पतंजलि को एक नोटिस भी जारी किया है जिसमें पूछा गया है कि उस पर जुर्माना क्यों न लगाया जाये। इसने जीएसटी अधिकारियों को कंपनी द्वारा आदेश को मानने की निगरानी करने और एक रिपोर्ट दाखिल करने का भी आदेश दिया है।
नवंबर 2017 में घटाया गया था जीएसटी
जीएसटी परिषद ने 15 नवंबर 2017 को डिटर्जेंट सहित उत्पादों पर टैक्स कटौती की घोषणा की थी। डिटर्जेंट पतंजलि द्वारा बेची जाने वाली वस्तुओं में से एक है। जीएसटी अधिनियम में कहा गया है कि कंपनियों को दर में कटौती या इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा ग्राहकों को फौरन देना होगा।
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