नई दिल्ली, जुलाई 24। आज ही के दिन 24 जुलाई, 1945 को अजीम प्रेमजी का जन्म हुआ था। वे देश की प्रतिष्ठित आईटी कंपनी विप्रो के चेयरमैन है। अजीम प्रेमजी देश के अमीरों की लिस्ट में गौतम अडानी और मुकेश अंबानी के बाद तीसरे नंबर पर हैं। चलिए आज उनके जन्मदिन पर जानते हैं उनके अमीरों की लिस्ट में आने की कहानी।
21 साल की उम्र में संभाला पारिवारिक बिजनेस
अजीम प्रेमजी के पिता एक बिजनेस मैन थे। वे साबुन और वेजिटेबल ऑयल का व्यापार करते थे। 21 साल की उम्र में पिता की मृत्यु के बाद उन्हें भारत लौटकर पारिवारिक बिजनेस को संभालना पड़ा। इसके बावजूद उनमें शिक्षा के प्रति जज्बा कायम रहा। उन्होंने 30 साल बाद स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ साइंस की डिग्री प्राप्त की।
1980 में आईटी कंपनी के तौर पर इंट्रोड्यूस
अजीम प्रेमजी ने वेस्टर्न इंडिया वेजिटेबल प्रोडक्ट्स लिमिटेड कंपनी को अमेरिकन कंपनी सेंटिनल कंप्यूटर कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर 29 दिसबंर 1980 में आईटी कंपनी के तौर पर इंट्रोड्यूस कराया। यह कंपनी पर्सनल कंप्यूटर बनाने के साथ सॉफ्टवेयर सर्विसेज की भी सुविधा उपलब्ध कराने लगी। उसके बाद ही कंपनी का नाम बदलकर विप्रो किया गया था। 30 जुलाई 2019 को आईटी कंपनी विप्रो के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर अजीम प्रेमजी रिटायर हो चुके हैं।
भारत के तीसरे और दुनिया के 48वें रईस
अजीम प्रेमजी की गिनती एशिया के सबसे बड़े दानवीरों में की जाती है। वर्ष 2021 में 9,713 करोड़ रुपए का दान देकर भारत के सबसे बड़े दानवीर बने। ऐसे ही महान प्रतिभा के धनी विप्रो के मालिक अजीम प्रेमजी का आज 77वां जन्मदिन है। ब्लूमबर्ग बिलिनेयर इंडेक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अजीम प्रेमजी भारत के तीसरे और दुनिया के 48वें रईस हैं। उनकी नेटवर्थ 25.6 अरब डॉलर है। साथ ही अजीम प्रेमजी को उनकी सादगी के लिए भी जाना जाता है अज़ीम प्रेमजी ने अपनी कमाई का मोटा हिस्सा परोपकारी कार्यों में लगाया। वे अपने हिस्से के साठ से ज्यादा शेयर्स उनके नाम से चल ही फाउडेंशन के नाम कर चुके हैं।


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