Auto Sector: टैरिफ का ऑटो सेक्टर पर कितना असर? इनवेस्टमेंट के लिए ये स्टॉक्स हैं पसंद, MOFSL ने किया एनलिसिस

Auto Sector: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार चौथे दिन तेजी रही. बाजार में जारी तेजी से पहले भारी बिकवाली देखने को मिली थी. बाजार में हलचल की वजह अमेरिकी टैरिफ है. इस एक्शन वाले मार्केट में ऑटो सेक्टर फोकस में हैं, क्योंकि टैरिफ का असर इस पर भी दिख रहा. इससे ग्लोबल सप्लाई चेन में भारी बदलाव देखने को मिल रहा. चीन और यूएस के बीच चल रहे टकरार से भारत के 74 अरब डॉलर की ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री के लिए यह एक लंबे इंतजार के बाद आने वाले ब्रेकआउट जैसा है.

यूएस टैरिफ के बीच भारत के लिए मौका?

अमेरिका की ओर से लागू किए गए टैरिफ का भारत के ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री पर 3 तरह से असर पड़ेगा. इसके तहत मार्च 2025 से स्टील/ एल्युमीनियम डेरिवेटिव्स पर 25% टैरिफ लागू हो गया है. मई 2025 से सेक्शन 232 के तहत ऑटो और पार्ट्स पर 25% टैरिफ लागू होगा. इसके अलावा चुनिंदा residual कैटेगरी पर भारत के लिए एक रिजन स्पेसिफिक 25% टैरिफ लागू होगा. हालांकि, स्मार्टफोन्स और सेमीकंडक्टर्स इससे बाहर रहेंगे. लेकिन ऑटो सेक्टर पर स्क्रूटनी बरकरार रहेगी.

अमेरिका में टैरिफ के चलते गाड़ियों की कीमतों में प्रति यूनिट 2500 से 12500 डॉलर तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. इससे मांग पर असर पड़ सकता है. साथ ही OEM की मार्जिन घट सकती है. ब्रोकिंग फर्म ने कहा कि इसका पूरा बोझ एक भी स्टेकहोल्डर, मैन्युफैक्चरर या फिर सप्लायर्स अकेले को नहीं लेंगे. ऐसे में कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पासऑन किया जा सकता है.

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जियो-पॉलिटिकल अनिश्चितताओं के बढ़ने से ग्लोबल OEM चीन+1 स्ट्रैटेजी को बढ़ा रही. इनमें से ज्यादातर ने भारत को लेकर रुचि दिखाया है. बढ़ती इनक्वायरीज को ऑर्डर्स और कैपासिटी में बदलने में 3-5 साल लग जाएगा. इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रोडक्ट अप्रुवल सायकल शामिल हैं. ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की स्थिति को नीतियों की स्थिरता, कंपीटेटिव प्राइसिंग और स्केलिंग स्पीड काफी कुछ तय करेगी.

क्या भारत को मिलेगा चीन+1 का फायदा?

भारत ने प्री-कोविड टाइम में चीन+1 के मौके का फायदा उठाने में पीछे रह गया था. जैसा कि वियतनाम, इंडोनेशिया और थाईलैंड ने इस भुनाया था और FDI का अपनी तरफ लाने में सफल रहे थे. हालांकि, भारत ऑटो कंपोनेंट में चीन के मुकाबले 10% ज्यादा कॉस्ट-कंपीटेटिव है. इस समय अमेरिका चीन की कंपनियों के साथ सहज नहीं हैं. ऐसे में भारत के लिए यह मौका हो सकता है.

किन स्टॉक्स में बन रहा मौका?

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने अपनी नोट टॉप एक्सपोर्ट ओरिएंटेड ऑटो कंपोनेंट पिक्स दिए हैं. इसमें Bharat Forge, Sona BLW, Motherson Sumi, Bosch, Varroc Engineering के शेयरों को शामिल किया गया है. MOFSL ने कहा कि ग्लोबल एक्सपोजर, लोकलाइजेशन पोटेंशियल और हेल्दी फाइनेंशियल्स के साथ इंडियन एक्सपोर्टर्स पर स्ट्रक्चरल खरीदारी का नजरिया है. हालांकि, ट्रेड डील में देरी, टैरिफ रीजिम में रिवर्सल या फिर कमजोर डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग रिस्पांस का रिस्क है.

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