नयी दिल्ली। बीएस-4 वाहनों की बिक्री के मामले में ऑटो कंपनियों को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। वाहन डीलरों को राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बीएस-4 एमिशन नॉर्म-कॉम्प्लायंट की बिक्री और रजिस्ट्रेशन की समय सीमा 31 मार्च से बढ़ा दी है। यानी अब 31 मार्च के बाद भी बीएस-4 वाहनों की बिक्री और रजिस्ट्रेशन हो सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कोरोनावायरस के कारण देश में घोषित हुए 21 दिवसीय लॉकडाउन की वजह से बनी असाधारण स्थिति को देखते हुए लिया गया है। इससे वाहन कंपनियों को अपना बीएस-4 गाड़ियों का स्टॉक निपटाने के लिए अधिक समय मिलेगा। पहले ऑटो कंपनियों को अपना बीएस-4 स्टॉक निपटाने के लिए 31 मार्च तक का समय दिया गया था। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हुई।
बिक सकेंगे 10 फीसदी बीएस-4 वाहन
हालांकि ऑटो कंपनियां अपनी सारे बीएस-4 वाहन नहीं बेच सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि देश में 24 मार्च से शुरू हुए लॉकडाउन के खत्म होने के बाद सिर्फ 10 दिन के लिए बीएस-4 मानक वाले बची हुई गाड़ियों में से केवल 10 फीसदी वाहनों की बिक्री की अनुमति दी जा सकती है। मगर इसमें भी सुप्रीम कोर्ट ने एक शर्त रखी है। राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण के उच्च स्तर के कारण दिल्ली-एनसीआर में डीलरों को राहत बीएस-4 वाहन बेचने की अनुमति नहीं मिलेगी। वरिष्ठ अधिवक्ता के.वी. विश्वनाथन और राघेंत बसंत फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (एफएडीए) की तरफ से पेश हुए।
1.7 लाख से अधिक कारें बाकी
एफएडीए की तरफ से पेश हुए वकील ने कोर्ट में जानकारी दी कि बीएस-4 स्टैंडर्ड वाले 7 हजार करोड़ रुपए से अधिक लागत के 1.7 लाख से अधिक कार और करीब 14,000 कमर्शियल वाहन बचे हैं, जिन्हें बेचा जाना है। एफएडीए ने यह अवधि 31 मई तक बढ़ाने का अनुरोध किया था, मगर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लगातार इन स्टैंडर्ड के वाहनो की बिक्री की डेडलाइन नहीं बढ़ाई जा सकती। अदालत ने डीलरों को भी नुकसान झेलने को तैयार रहने के लिए कहा।
बीएस-5 छोड़ दिया गया
बता दें कि 2016 में केंद्र सरकार ने घोषणा की थी कि भारत बीएस-5 मानदंडों को पूरी तरह से छोड़ देगा और 2020 तक बीएस-6 मानदंडों को अपनाएगा। देश में अप्रैल, 2017 से बीएस-4 मानक लागू हैं। शीर्ष अदालत ने 24 अक्टूबर 2018 को कहा था कि 1 अप्रैल 2020 से भारत में कोई भी बीएस-4 वाहन बेचा या रजिस्टर नहीं किया जाएगा। बीएस उत्सर्जन मानदंड सरकार द्वारा मोटर वाहनों से वायु प्रदूषकों के उत्पादन को विनियमित करने के लिए लगाए गए मानक हैं।
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