नयी दिल्ली। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून तिमाही) के आंकड़े घोषित कर दिए हैं। पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के मुकाबले इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी में 23.9 फीसदी की गिरावट आई है। कोरोनोवायरस महामारी को काबू में रखने के लिए इस तिमाही के दौरान देश में आर्थिक गतिविधियां सीमित रहीं। इसी कारण जीडीपी में इतनी अधिक गिरावट आई है। कम से कम चार दशकों में भारत की जीडीपी में पहली बार गिरावट आई है, जबकि 1996 में तिमाही आंकड़े जारी होने की शुरुआत के बाद ये पहला मौका है। इस साल जनवरी-मार्च तिमाही में अर्थव्यवस्था 3.1 प्रति वर्ष की दर से बढ़ी थी, जो पिछले 17 सालों में सबसे कम थी। 2019-20 की जून तिमाही में ये 5.2 फीसदी रही थी। भारत की जीडीपी वृद्धि दर वित्त वर्ष 2018-19 में 6.1 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2019-20 में 4.2 प्रतिशत रह गई, जो कि 11 वर्षों में सबसे धीमी रफ्तार थी।
जीवीए में भी आई गिरावट
एक्सपर्ट्स पहले से ही जीडीपी में भारी गिरावट का अनुमान लगा रहे थे, क्योंकि ये पूरी तिमाही कोरोनावायरस और लॉकडाउन में बीती। इस तिमाही में सकल मूल्यवर्धित वृद्धि (जीवीए) में भी 22.8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। अर्थशास्त्रियों ने जीडीपी में 16 से 25 फीसदी और जीवीए में 19 से 25 फीसदी की गिरावट का अंदाजा लगा रहे थे। एनएसओ द्वारा जारी किया गया डेटा, जो सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अंतर्गत आता है, महत्वपूर्ण है क्योंकि यह महामारी के बाद भारत की अर्थव्यवस्था की स्थिति पर पहला बेंचमार्क प्रदान करेगा।
किस सेक्टर में कितनी गिरावट
अलग-अलग सेक्टरों में देखें तो अप्रैल-जून तिमाही में इंडस्ट्रीज की ग्रोथ में -38.1 फीसदी, सर्विसेज में -20 फीसदी, मैनुफैक्चरिंग में -39.3 फीसदी, व्यापार, होटल में -47 फीसदी की गिरावट आई। जबकि इस दौरान कृषि और संबंधित गतिविधियों में 3.4 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन (जीएफसीएफ) में 52.9%, बिजली में 7 प्रतिशत और निर्माण गतिविधियों में 50.3 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके अलावा खनन में -23.3 प्रतिशत, ऊर्जा और गैस में -7 प्रतिशत, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में -10.3 प्रतिशत, फाइनेंस, रियल एस्टेट -5.3 फीसदी की गिरावट आई।
जीडीपी का स्थिर मूल्य
आज जारी हुए आंकड़ों के मुताबिक पहली तिमाही में स्थिर कीमतों जीडीपी 26.90 लाख करोड़ रुपये है। मगर ये पिछले वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में 35.35 लाख करोड़ रु की थी, जो 23.9 फीसदी की गिरावट को साफ दर्शाता है। वहीं जीवीए, किसी देश में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य का एक मापक, स्थिर कीमतों में 25.53 लाख करोड़ रुपये का रहा, जबकि वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही में 33.08 लाख करोड़ रुपये था। इससे जीवीए में आई 22.8 फीसदी की गिरावट साफ दिखती है।
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