नयी दिल्ली। अमेरिका के तीसरे सबसे बड़े बैंक सिटीग्रुप इंक ने रेवलॉन इंक के कर्जदाताओं को गलती से भेजे गए लगभग 1 अरब डॉलर वापस पाने के लिए एक और प्रयास में तीसरा मुकदमा दायर किया। बैंक ने अभी तक "ऑपरेशनल गड़बड़ियों" के चलते एक दर्जन फर्मों पर मुकदमा दायर किया है। इन गड़बड़ियों के कारण बैंक ने रेवलॉन कर्जदारों को 90 करोड़ डॉलर का फंड ट्रांसफर किया है। बैंक के अनुसार कई करोड़ डॉलर पहले ही इसके वापस आ गए हैं। मगर इसे 50 करोड़ डॉलर से अधिक की वसूली के लिए उन कर्जदाताओं के लिए खिलाफ कानूनी कार्रवाई करनी पड़ी है, जो पैसा वापस करने से इनकार कर रहे हैं।

कोर्ट ने फंड पर लगाई रोक
बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के अनुसार सिटीग्रुप की तरफ से कहा गया है कि सिटी के सारे पैसे (जो गलती से भेजे गए) या तो बैंक के पास वापस आ गए हैं या फिर कोर्ट के ऑर्डर से उन उन्हें फ्रीज कर दिया गया है। कुछ दिन पहले आई एक रिपोर्ट के अनुसार सिटीग्रुप रेवलॉन के कर्जदारों से 90 करोड़ डॉलर वापस लेने का प्रयान कर रहा था। इस फंड को रेवलॉन की ओर से इसके कर्जदारों को भेजा गया था। बैंक ने इसे एक लेखन त्रुटि (Clerical Error) कहा था। बता दें कि संकट से गुजर रही रेवलॉन एक कॉस्मैटिक कंपनी है।
मुश्किल में है रेवलॉन
सिटी ग्रुप की तरफ से हुई ये गड़बड़ी यूएमबी फाइनेंशियल द्वारा रेवलॉन पर किए गए मुकदमे का बाद सामने आई। यूएमबी फाइनेंशियल ने रेवलॉन पर ब्रिगेड कैपिटल और एचपीएस इन्वेस्टमेंट सहित कुछ कंपनियों की तरफ से मुकदमा किया है। ये कंपनियां रेवलॉन ने तुरंत अपान पैसा वापस चाहती हैं। मुकदमे में दावा किया गया है कंपनी ने अन्य लेनदारों के लाभ के लिए अपनी मूल्यवान ब्रांड संपत्ति को इन कर्जदारों की पहुंच से दूर कर दिया है।


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