नयी दिल्ली। भारत में मौजूद चीन की कंपनियों, साथ ही सीमा पार से निवेश वाली कुछ विदेशी कंपनियां, के बीजिंग की आर्मी के साथ कथित कनेक्शन की संभावना है, जिसके चलते केंद्र सरकार सतर्क हो गई है। इन कंपनियों पर सरकार की पैनी नजर है। इन कंपनियों के चीन की पीप्लस लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के साथ कनेक्शन होने की संभावना है। केंद्र सरकार चीन की कंपनियों के अर्थव्यवस्था में भागीदारी को कम करने की योजना के साथ आगे बढ़ रही है। भारत सरकार ने एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) नियमों में भी बदलाव कर दिया है, जिससे निवेशकों को ट्रैक करने में आसानी होगी। साथ ही चीनी निवेशकों से फंडिंग वाले स्टार्ट-अप सहित ऐसी कंपनियों में नए निवेश की विस्तार से जांच की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इनसे सुरक्षा संबंधित कोई खतरा नहीं है।
सेबी और वित्त मंत्रालय का प्लान
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार वित्त मंत्रालय और बाजार रेगुलेटर सेबी सीमा पार से निवेश की जांच के लिए नियम को अंतिम रूप दे रहे हैं, जबकि यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि ऐसे किसी नियम से बाजार की धारणा प्रभावित न हो। एक सरकारी सूत्र के अनुसार डेटा की जांच की जा रही है और दोनों एजेंसियां रिपोर्टिंग और निगरानी का सिस्टम तय करेंगी। 15 जून की रात लद्दाख की गलवान घाटी में पीएलए और भारतीय फौज के बीच हुई झड़प के बाद चीनी कंपनियां मोदी सरकार के रडार पर आ गई हैं। सरकार ने कारोबार के लिहाज से चीन की कंपनियों के खिलाफ एक के बाद कई सख्त कदम उठाए हैं।
भारत के अलावा इन देशों ने की कार्रवाई
भारत से पहले से कई देशों, जिनमें अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं, ने चीनी दूरसंचार वेंडर हुआवेई के ऑपरेशन पर रोक लगाई है, जिसके फाउंडर के कथित तौर पर पीएलए की इंजीनियरिंग कॉर्प के साथ संबंध थे। हालांकि कंपनी ने कहा है कि चीनी सेना के साथ उसके संबंध नहीं हैं। इधर भारत ने 59 चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया है। इससे चीन की उस महत्वाकांक्षा को झटका लगा, जिसके तहत ये अपनी टेक कंपनियों को अमेरिकी दिग्गज कंपनियों के मुकाबले में लाने चाहता है। इसने 5जी कारोबार में हुआवेई और जेडटीई की भागीदारी पर भी संदेह गहरा गया है।
खनन कंपनियों के भी पीएलए से संबंध
सूत्रों ने कहा कि कुछ चीनी खनन, इस्पात और यहां तक कि ऑटो कंपनियों के अतीत में पीएलए के साथ संबंध रहे हैं। इसी प्रकार सरकार के सामने ऐसे उदाहरणों भी आए हैं जहां विदेशी संस्थाएँ, जिनमें से कुछ यूरोप से हैं, का निवेश किसी भारतीय कंपनी में है, लेकिन उस विदेशी कंपनी का नियंत्रण एक चीनी कंपनी द्वारा किया जाता है। इस बीच चीन ने कहा है कि 2020 की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) में उसकी अर्थव्यवस्था पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 3.2 फीसदी की दर से बढ़ी। चीन की इकोनॉमी ने पहली तिमाही की गिरावट से उभरते हुए जानकारों के अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया है। चीन ने कोरोनावायरस की वजह से लगाए गए लॉकडाउन में राहत दी, जिसका इसकी इकोनॉमी पर सकारात्मक असर पड़ा।


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