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Anil Ambani पर एक और मुसीबत, कर्जदार बेच रहे उनकी Reliance Naval

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नयी दिल्ली। लंबे समय से संकट से गुजर रहे अनिल अंबानी की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। उनके सामने एक और नई मुसीबत आ गई है। उनके ग्रुप की रिलायंस नेवल, जो जहाज बनाने वाली कंपनी है, के कर्जदारों ने इस कंपनी को खरीदने में रुचि रखने वाले खरीदारों से आवेदन मांगे हैं। रिलायंस नेवल के कर्जदार दिवाला और दिवालियापन कोड (आईबीसी) के तहत कंपनी को बेचना चाहते हैं। रिलायंस नेवल के चेयरमैन अनिल अंबानी हैं। रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के बाद अनिल अंबानी के नियंत्रण वाले रिलायंस समूह की रिलायंस नेवल ऐसी दूसरी कंपनी जिसे दिवालिया कार्यवाही के दायरे में लाया गया है। बता दें कि 15 जनवरी को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल की अहमदाबाद पीठ ने इस कंपनी के दिवाला कार्यवाही को हरी झंडी दिखा दी थी।

आईडीबीआई बैंक ने की थी शिकायत
 

आईडीबीआई बैंक ने की थी शिकायत

रिलायंस नेवल को सबसे पहले एनलीएलटी/दिवालिया अदालत में करीब 16 महीने पहले आईडीबीआई बैंक लेकर गया था। बैंक ने कंपनी के खिलाफ 1,159.43 करोड़ रुपये के बकाया का दावा किया था। रिलायंस नेवल ने जनवरी में स्टॉक एक्सचेंज को बताया था कि ये 9492 करोड़ रु के लोन पर डिफॉल्ट हो गई है। जहां तक कंपनी के लेनदारों द्वारा बिकवाली के लिए आवेदन का सवाल है तो रुचि रखने वाले खरीदार 27 जून तक इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। संभावित आवेदकों (खरीदारों) की अंतिम लिस्ट 17 जुलाई को जारी की जाएगी।

5 सितंबर को अदालत में जाएगा मामला

5 सितंबर को अदालत में जाएगा मामला

निवेशकों को रिलायंस नेवल के लिए एक रेज्योल्यूशन प्लान पेश करना होगा, जिसे जमा करने की अंतिम तिथि 6 अगस्त है और योजना को 5 सितंबर को मंजूरी के लिए दिवाला अदालत में पेश किए जाने की उम्मीद है। मालूम हो कि 2019 की अपनी सालाना रिपोर्ट में कंपनी ने अपने सामने नकदी संकट की बात कही थी, जिससे इसके प्रोजेक्ट्स प्रभावित हुए और इसके क्लाइंट्स का भरोसा डगमगा गया। इसी भरोसा डगमगाने के कारण को कंपनी को नए ऑर्डर मिलने में दिक्कत हुई और कंपनी के पास अपनी क्षमता से काफी कम काम रह गया।

2013 से परेशानियां आ रहीं सामने
 

2013 से परेशानियां आ रहीं सामने

रिलायंस नेवल का पुराना नाम पिपावाव डिफेंस एंड ऑफशोर इंजीनियरिंग था, जिसकी शुरुआत 1997 में की गई थी। इसे 2015 में अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप ने खरीद लिया। पिपावाव का 17.66 प्रतिशत रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने 5 मार्च 2015 को 13 करोड़ की डील में हासिल किया था। इसके बाद कंपनी ने अन्य तरीकों से इसमें अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई। मगर इसके सामने दिक्कतें 2013 से ही आ रही थीं। वक्त के साथ अनिल अंबानी ग्रुप की मुसीबतें भी बढ़ती गईं। ग्रुप ने हाल ही में अपने दिल्ली बिजली वितरण कारोबार को बिक्री के लिए रखा है। इससे पहले ग्रुप ने अपने मुंबई बिजली वितरण कारोबार को अडानी समूह को बेच दिया था।

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English summary

Another trouble on Anil Ambani debtor selling his Reliance Naval

The chairman of Reliance Naval is Anil Ambani. After Reliance Communications Ltd, Reliance Naval is the second company of Anil Ambani-controlled Reliance Group to be brought under insolvency proceedings.
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