नई दिल्ली, मई 9। देश की सबसे बड़ी बीमा और सरकारी कंपनी एलआईसी का आईपीओ खुला है। सरकार आईपीओ के जरिए एलआईसी में अपनी थोड़ी ही सही मगर कुछ हिस्सेदारी बेच रही है। इसका विरोध भी हुआ है। सरकार इससे पहले कई सरकारी कंपनियों को बेच चुकी है और कुछ का विलय दूसरी कंपनियों में कर चुकी है। अब एक और कंपनी का नंबर लगा है। आगे जानिए कि अब कौन सी सरकारी कंपनी बिकने जा रही है।
क्या है प्लान
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार सरकार गैर-प्रमुख संपत्तियों के अलग होने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सितंबर तक शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एससीआई) के लिए फाइनेंशियल बिड आमंत्रित कर सकती है। रणनीतिक बिक्री प्रक्रिया के तहत सरकार शिपिंग हाउस और पुणे में प्रशिक्षण संस्थान और एससीआई की कुछ अन्य गैर-प्रमुख संपत्तियों को बंद कर रही है।
डिमर्जर की प्रोसेस है लंबी
डीमर्जर की प्रक्रिया में समय लगता है। एक अधिकारी के अनुसार 3-4 महीनों में वित्तीय बोलियां आमंत्रित करने के लिए तैयार होंगे। शिपिंग कॉर्प के बोर्ड ने पिछले हफ्ते बैठक की और शिपिंग हाउस, मुंबई और एमटीआई (समुद्री प्रशिक्षण संस्थान), पवई और शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लैंड एंड एसेट्स लिमिटेड (एससीआईएलएएल) सहित एससीआई की गैर-प्रमुख संपत्तियों को अलग करने के लिए एक अपडेटेड डीमर्जर योजना को मंजूरी दी। इन संपत्तियों का विलय नई कंपनी एससीआईएलएएल में किया जाएगा।
कैसी है बैलेंस शीट
एससीआई की बैलेंस शीट के अनुसार, 31 मार्च, 2022 तक डीमर्जर के लिए रखी गई गैर-प्रमुख संपत्तियों का मूल्य 2,392 करोड़ रुपये था। एससीआई बोर्ड ने पिछले साल अगस्त में, पहचान की गई गैर-प्रमुख संपत्तियों को अलग करने के लिए एक डिमर्जर योजना को मंजूरी दी थी और नवंबर 2021 में कंपनी की ऐसी संपत्तियों को रखने के लिए एससीआईएलएएल को शुरू किया था, जो पोर्ट्स शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय के अधीन है।
मंत्रालय का निर्देश
मंत्रालय ने अप्रैल 2022 में, एससीआई को इसकी गैर-प्रमुख संपत्तियों के एससीआईएलएएल में डीमर्जर की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया था और एससीआई के बोर्ड से शिपिंग हाउस, मुंबई और एमटीआई, पवई सहित गैर-प्रमुख संपत्तियों को अलग करने के लिए डीमर्जर योजना की समीक्षा करने का भी अनुरोध किया था।
पिछले साल मिली थी बोलियां
पिछले साल मार्च में सरकार को शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के निजीकरण के लिए कई बोलियां मिली थीं। निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीमप) ने दिसंबर 2020 में, मैनेजमेंट ट्रांसफर के साथ-साथ शिपिंग कॉर्प ऑफ इंडिया में अपनी संपूर्ण 63.75 प्रतिशत हिस्सेदारी के रणनीतिक विनिवेश (बेचने) के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। नवंबर 2020 में कैबिनेट ने शिपिंग कॉर्प के रणनीतिक विनिवेश के लिए मंजूरी दी थी। एससीआई का निजीकरण अब चालू वित्त वर्ष में पूरा होने की संभावना है। सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2022-23 में सीपीएसई विनिवेश से 65,000 करोड़ रुपये जुटाने का बजट रखा है। सरकार पहले ही ओएनजीसी में माइनोरिटी शेयर बिक्री से 3,000 करोड़ रुपये जुटा चुकी है, वहीं इस महीने जीवन बीमा निगम के मौजूदा आईपीओ से 21,000 करोड़ रुपये और स्टार9 मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड को पवन हंस प्रबंधन नियंत्रण सौंपने के बाद इसे 211.14 करोड़ रुपये मिलेंगे। स्टार9 मोबिलिटी, बिग चार्टर प्राइवेट लिमिटेड, महाराजा एविएशन प्राइवेट लिमिटेड और अल्मास ग्लोबल अपॉर्चुनिटी फंड एसपीसी का एक संघ है।
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