नयी दिल्ली। सरकार किसानों को राहत पहुंचाने के लिए कई योजनाएं पेश कर चुकी है। इसी कड़ी में एक और फैसिलिटी शुरू की गई है, जिसके जरिए किसान बिना किसी अतिरिक्त लाइसेंस के अपना उत्पाद विदेशों तक में बेच सकेंगे। इस फैसिलिटी की शुरुआत भी हो चुकी है। उदाहरण के लिए मुजफ्फरपुर, बिहार के एक किसान के पास एक्सपोर्ट का कोई लाइसेंस नहीं था, मगर इसके बावजूद उनके द्वारा उगाई गई लीची लंदन पहुंच गई। सरकार नई सुविधा के जरिए और भी किसानों की फसल और उत्पादन को विदेशों में पहुंचाने का प्रबंध कर रही है। ये किसानों के लिए बेहद शानदार फैसिलिटी है, जिसके जरिए उन्हें कभी भी जाए बिना अपने उत्पाद की बेहतर लागत मिलती है। जानकारी के लिए बता दें कि ये फैसिलिटी आईटी मंत्रालय के सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) के जरिए दी जा रही है। अच्छी बात ये है कि किसानों को फसल बिकने के बाद पैसों के लिए इंतेजार नहीं करना पड़ता। बल्कि उत्पाद बिकते ही उनके खाते में पूरी पेमेंट आ जाती है। आइये जानते हैं कि ये पूरा प्रोसेस।
ये है पूरा प्रोसेस
बिना किसी भागा-दौड़ी के अपना माल विदेशों में बेचने के लिए किसानों को सबसे पहले सीएससी के ई-मार्ट पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा। ध्यान रहे कि रजिस्ट्रेशन के समय किसी भी किसान को कुछ महत्वपूर्ण जानकारी देनी होगी, जिसमें उत्पाद की जानकारी, उसका आकार (यानी वजन आदि) शामिल है। साथ ही किस कीमत पर वे अपनी फसल बेचना चाहते हैं ये भी बताना होता है। जमीन की जानकारी और किसान होने का प्रमाण भी देना होगा। किसान के पास बैंक अकाउंट होना जरूरी है, जिसमें उत्पाद की पेमेंट आएगी। हालांकि रजिस्ट्रेशन प्रोसेस में विलेज लेवल एंट्रेप्रेन्योर (वीएलई) किसानों की पूरी सहायता करते हैं। पूरी जानकारी दिए जाने के बाद यह डिटेल ट्रेडर्स और कृषि निर्यातकों को दी जाती है।
क्या है ई-मार्ट प्लेटफॉर्म
ई-मार्ट प्लेटफॉर्म एक खास कारोबारी मंच है, जहां किसानों की फसल के लिए बोली लगाई जाती है। ई-मार्ट प्लेटफार्म पर ट्रेडर्स और एग्री निर्यातक भी मौजूद रहते हैं। उन्हें किसानों के उत्पाद दिखा जाते हैं और इसी आधार पर वे उनके लिए बोली लगाते हैं। असल में ट्रेडर्स और एक्सपोर्टर को किसान द्वारा अपने उत्पाद के लिए मांगी जाने वाली कीमत नहीं बताई जाती। इससे किसानों को बड़ा फायदा होता है। उदाहरण के लिए एक किसान अपने एक उत्पाद को 10 रु प्रति किलो पर बेचना चाह रहा था, मगर उसके उत्पाद के लिए 10.50 रु प्रति की बोली लगाई गई।
ऐसे होती है किसानों को पेमेंट
किसान के उत्पाद की बोली लगने के साथ ही ट्रेडर्स और निर्यातकों को आधी कीमत सीएससी से जुडे़ अकाउंट (किसान के अकाउंट) में जमा करनी होती है। इसके बाद कारोबारी की तरफ से तसल्ली और उत्पाद के वेरीफिकेशन के लिए अपने किसी कर्मचारी को भेजा जाता है। उत्पाद को ले जाने के साथ ही ट्रेडर सीएससी पर दिए अकाउंट में पूरा पैसा जमा कर देते हैं। इस पूरी प्रोसेस से बिचौलियों से किसान मुक्त हो गए हैं। इससे किसानों का लाभ भी बढ़ेगा।
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