नयी दिल्ली। एक समय दुनिया के छठे सबसे अमीर व्यक्ति रहे अनिल अंबानी की मुसीबतें कम होने का नाम ले रही हैं। वे कर्ज के जाल में फंसे हुए हैं। अब लेनदार उनकी संपत्तियों के पीछे हैं। कर्जदाताओं को हर हाल में अपना पैसा वापस चाहिए, इसलिए अब अंबानी की कंपनियों को बेचने का नंबर लग गया है। इसके लिए बकायदा दूसरी कंपनियों को जिम्मेदारी भी सौंपी गयी है। कर्जदाताओं ने 2 कंपनियों को नियुक्त किया है जो अंबानी की रिलायंस कैपिटल की संपत्तियां बेचेंगी। आइए जानते हैं पूरा मामला।
इन कंपनियों को किया गया अपॉइंट
अनिल अंबानी की रिलायंस कैपिटल डिबेंचरधारकों और बाकी लेनदारों को कर्ज चुकाने में नाकामयाब रही है। इसीलिए रिलायंस कैपिटल के कर्जदाताओं ने कंपनी की संपत्ति बेचने के लिए एसबीआई कैप्स और जेएम फाइनेंशियल को नियुक्त किया है। रिलायंस कैपिटल के कुल कर्ज में डिबेंचर धारकों की हिस्सेदारी 99 फीसदी है। इन लेनदारों ने रिलायंस कैपिटल के कर्ज समाधान के लिए एक समिति भी बनाई है। अब जानते हैं रिलायंस कैपिटल पर डिबेंचर धारकों का कितना कर्ज है।
करीब 20000 करोड़ रु का लोन
रिलायंस कैपिटल पर 19,806 करोड़ रुपये का कर्ज है, जिसमें बैंकों और डिबेंचर धारकों के लिए 31 अगस्त 2020 तक का ब्याज भी शामिल है। इसमें सिर्फ डिबेंचर धारकों के 15 हजार करोड़ रु फंसे हुए हैं। कर्ज वसूलने के लिए जो समिति बनी है उसका नेतृत्व कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) और जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के हाथ में है, जो रिलायंस कैपिटल की संपत्तियों की बिक्री पर तेजी से आगे बढ़ी हैं। इनमें ईपीएफ का रिलायंस कैपिटल पर करीब 2500 करोड़ रु बकाया है।
क्या-क्या बिकेगा
एक रिपोर्ट के अनुसार ट्रस्टी विस्तारा बोलीदाताओं को आमंत्रित करते हुए इस सप्ताह एक्सप्रेशन ऑफ इंटेरेस्ट जारी किया जाएगा। जो संपत्तियां बिक्री के लिए रखी गई हैं उनमें निजी क्षेत्र की तीसरी सबसे बड़ी बीमा कंपनी रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी में रिलायंस कैपिटल की पूरी हिस्सेदारी और निप्पॉन लाइफ इंश्योरेंस में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है। रिलायंस कैपिटल की रिलायंस सिक्योरिटीज में 100 फीसदी और रिलायंस एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी में 49 फीसदी हिस्सेदारी है। अन्य प्राइवेट इक्विटी और रियल एस्टेट निवेश में हिस्सेदारी के अलावा रिलायंस हेल्थ में भी कंपनी की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
किस तरह बिकेगी हिस्सेदारी
कोई कंपनी रिलायंस कैपिटल में पूरी हिस्सेदारी के लिए बोली लगा सकता है। इसके अलावा किसी एक संपत्ति या बिक्री के लिए रखी गई संपत्तियों के कॉम्बिनेशन के लिए भी बोली लगा सकता है। इस साल मार्च में रेटिंग फर्म CARE ने रिलायंस कैपिटल की सब्सिडरी कंपनी रिलायंस होम फाइनेंस के 11,726 करोड़ रुपये को डिफ़ॉल्ट कैटेगरी में डाल दिया था। रिलायंस कैपिटल की एक और सब्सिडरी कंपनी रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस भी कर्ज समाधान पर मुकदमे का सामना कर रही है।
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