When Sensex@1lakh: बजट 2024 आने में अब कुछ ही घंटे बचे हैं। वहीं इस दौरान शेयर बाजार ने भारी तेजी दर्ज की है। इसी को ध्यान में रखते हुए गुडरिटर्न की एडीटर श्रुति सरकार ने आनंद राठी के वरिष्ठ इक्विटी मैनेजर जिगर एस पटेल से खास बातचीत की। इस दौरान जहां शेयर बाजार कहां तक जा सकता है, यह पर बात हुई वहीं दुनिया भर में चल रहे युद्ध और अन्य दिक्कतों पर चर्चा की गई।
शेयर बाजार बजट के बाद कितना रिटर्न दे सकता है और सेंसेक्स 1 लाख अंक का स्तर कब तक छूट सकता है, इस पर भी बात हुई। वहीं शेयर बाजार के सामने क्याक्या रिस्क हो सकते हैं, इस पर भी जिगर एस पटेल ने खुलकर अपनी राय दी।

जिगर एस पटेल का कहना है कि शेयर बाजार 2024 में 10 फीसदी का रिटर्न दे सकता है। इनका कहना है कि इतने रिटर्न की उम्मीद रखना उचित भी है। हालांकि जब इनसे यह पूछा गया कि सेंसेक्स 1 लाख अंक का स्तर कब टच कर सकता है, तो इनका कहना था कि अगर 10 फीसदी औसत हर साल का रिटर्न भी मान लिया जाए तो अगले 3 साल से लेकर 4 साल में यह आसानी से 1 लाख अंक के स्तर को टच कर सकता है।
दुनिया में इस वक्त कई इलाकों में युद्ध चल रहे हैं। इसके अलावा कई इलाकों में तनाव की स्थितियां हैं। ऐसे में जिगर एस पटेल का कहना था कि इन सभी हालाते के बीच भी भारत का शेयर बाजार लगातार बढ़ता रहा है। इनका मानना है कि भारत में विकास की काफी संभावनाएं हैं। ऐसे में अगर ब्याज दरों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादा दिक्कतें नजर नहीं आ रही हैं। ऐसा इसलिए भी कहा जा सकता है कि कोविड के बाद भी भारत इसी तरह से उठ खड़ा हुआ था। हालांकि जोखिम के रूप में इनका मानना है कि ब्याज दरों बड़ा कारण हैं। यह कम होना शुरू होंगी, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।
जहां तक लोकसभी के चुनाव की बता है, जो मई में होने जा रहें, तो इनका मानना है कि शेयर बाजार ने शायद मान लिया है कि सरकार रिपीट होने वाली है। यही कारण है कि इस वक्त शेयर बाजार में अच्छी तेजी नजर आ रही है। इनका मानना है कि निफ्टी-50 22,000 अंक तक पहुंच ही रहा है। यह 23,500 या कुछ हद तक 24,000 अंक का स्तर भी दिखा सकता है। हालांकि इनका मानना है कि यह तेजी एक तरफ नहीं चल सकती है। ऐसे में इनका मानना है कि बीच बीच में गिरावट का दौर आता रहेगा। लेकिन जहां तक ट्रेंड की बात है तो यह तेजी का ही बना रहेगा।
जहां तक बजट से उम्मीदों की बात है तो जिगर एस पटेल का कहना है कि यह अंतरिम बजट है, और वित्त मंत्री पहले ही कह चुकी हैं कि किसी बड़ी घोषणा की उम्मीद नहीं रखना चाहिए। ऐसे में ज्यादा उम्मीदें लगाना ठीक नहीं है। कुल मिलाकर इनको लगता है कि टैक्स के संदर्भ में कुछ छोटी घोषणाएं की जा सकती हैं।


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