India is a heaven for tax evasion: भारत में टैक्स चोरी का हिसाब किताब लगाना कठिन है, लेकिन आंकड़े चौंकाते हैं। अगर इन आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो लगता है कि भारत टैक्स चोरों का स्वर्ग है।
आईआईएफएल की पूर्व वेल्थ मैनेजर नेहा नागर ने एक ट्वीट कर इस संबंध रोचक जानकारी साझा की है। इनके ट्वीट के अनुसार देश में 140 करोड़ लोग रहते हैं, लेकिन केवल 6.77 करोड़ ही इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइल करते हैं।

इसमें भी एक खास बात है कि केवल 20 लाख लोग ही ऐसे हैं, जो आमदनी 20 लाख रुपये या इससे ज्यादा बताते है। अगर देखा जाए तो इसमें से ज्यादातर वह लोग हैं, जो वेतनभोगी हैं। यानी बहुत से लोग हैं, जो टैक्स के दायरे बाहर बने हुए हैं।
इसी ट्वीट में इन्होंने एक और रोचक जानकारी दी है। इसके अनुसार एकत्र किए गए आयकर आंकड़ों से पता चलता है कि केवल 1.7 लाख लोग ही ऐसे हैं जो एक वर्ष में 1 करोड़ रुपये से अधिक की आय रिपोर्ट करते हैं।
वहीं देश में हर साल बीएमडब्ल्यू, जगुआर, ऑडी, मर्सिडीज, पोर्श और मासेराती जैसे लक्जरी कार की बिक्री करीब 35,000 है। यानी जिस गति से करोड़ों रुपये की कारें बिक रही हैं, उस गति से 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की आय बताने वाले नहीं बढ़ रहे हैं।
वहीं अगर आयकर रिटर्न के आंकड़ों को देखा जाए तो देश में इस बार 45 लाख लोगों ने अपनी आय को 10 लाख रुपये से ज्यादा का दिखाया है। वहीं अगर देश में कारों की बिक्री पर नजर डाली जाए तो हर साल देश में करीब 25 लाख कार बिकती हैं। यानी आय दिखाने के नाम पर कुछ तो सही नहीं चल रहा है।
जहां तक इनकम टैक्स आईटीआर फाइलिंग की बात है तो इस साल 31 जुलाई 2023 तक 6.77 करोड़ आईटीआर फाइल हुए हैं। इसमें पिछले साल की तुलना में 16.1 फीसदी की बढ़त है। यानी करीब 53.67 लाख नए आईटीआर फाइल किए गए हैं। लेकिन यह प्रयास पूरा सफल नहीं हो पा रहा है। सरकार को इस दिशा में और काम करना होगा।
लेकिन यहां पर एक बात का और ध्यान रखना जरूरी है कि देश में काफी बड़ी संख्या में आईटीआर बिना आमदनी के फाइल होते हैं। इनकी संख्या काफी ज्यादा है। ऐसे में तथ्य बताते हैं कि नौकरी पेशा लोगों को छोड़ कर काफी लोग अभी भी टैक्स के दायरे से बाहर हैं।
नौकरी पेशा लोगों की आमदनी ऑन पेपर होती हैं, ऐसे में उन पर टैक्स के नियम आसानी से लागू हो जाते हैं। लेकिन सरकार को अब उन लोगों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए, जो कमा तो बहुत रहे हैं, लेकिन टैक्स के दायरे से बाहर हैं। यानी बड़ा खर्च करने दिख तो रहे हैं, लेकिन वह आयकर के दायरे में नहीं लाए जा पा रहे हैं।
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