नई दिल्ली, जुलाई 31। भारत की एक ऐसी कंपनी अमूल जिसने लोगो के दिल में अपनी जगह बना ली है। क्योंकि इस कंपनी बहुत सारे लोगो को रोजगार दिया है साथ ही अमूल कंपनी पूरी दुनिया में बेहतरीन डेयरी प्रोडक्ट की आपूर्ति कर रही है। आपने कभी सोचा है कि अमूल की सफल होने की कहानी क्या है और कौन है इस कंपनी के मालिक। इसको जानना भी जरूरी है। चलिए आज हम आपकों बताते है अमूल की की सफलता की कहानी।
अमूल के शुरुवात के पीछे की कहानी
अमूल की शुरुवात के पीछे की कहानी वर्ष 1946 से पूर्व भारत कृषि और पशुपालन में बहुत लगा हुआ था। इसलिए किसानों के पास दूध की कमी और चिंता नहीं थी। उस समय गुजरात में पोलसन डेयरी हुआ करती थी। जो अमीर लोगो के लिए बहुत प्रसिद्ध थी। उनका काम बड़े घरों में दूध पहुंचाना था। कई लोग कहते है कि वर्गीज कुरियन अमूल कंपनी के मालिक हैं मगर वर्गीज कुरियन बाद में अमूल में शामिल हो गए। बहुत से लोगो के सहयोग से चलने वाली अमूल कंपनी एक दुग्ध सहकारी संस्था है। त्रिभुवनदास कृषिभाई पटेल अमूल के संस्थापक के रूप में जाना जाता है।
वर्गीस कुरियन वर्ष 1949 में भारत आए
श्वेत क्रांति का जनक कहे जाने वाले वर्गीज कुरियन ने अमूल की स्थापना के बाद इसे बड़ी कंपनी बनाने में अपनी पूरी मेहनत की है। अमूल में शामिल होने से पहले वर्गीज कुरियन अमेरिका में बेहतर नौकरी कर अपना जीवन बिता रहे थे। त्रिभुवनदास के कहने पर वर्ष 1949 में अमूल के संस्थापक वर्गीस कुरियन भारत आए और अमूल कंपनी में शामिल हो गए।
अमूल का बिजनेस मॉडल
दूध एक ऐसी चीज है जिसे दो दिन से ज्यादा नहीं रखा जा सकता है। नही तो वो खराब हो जाता है। इसलिए चुनौती ये थी कि अमूल को जो दूध मिल रहा उस दूध को समय पर लोगो तक कैसे पहुंचाया जाए। अमूल का बिजनेस मॉडल का श्रेय भी वर्गीज कुरियन को ही जाता है। अमूल ने एक ऐसा बिजनेस मॉडल बनाया है, जिसकी सहायता से न केवल अमूल साथ ही किसानों की भी कमाई हो रही है। अमूल किसानों को दूध उत्पादन के लिए प्रोत्साहन भी दे रहा है। इसी कारण बहुत सारे किसान दूध उत्पादन के लिए ध्यान भी दे रहे है साथ बहुत अधिक लाभ भी कमा रहे है।


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