नयी दिल्ली। आपने अकसर अमेरिकी वीजा के मामले में ए-1बी शब्द सुना होगा। एच-1 बी अमेरिका में इमिग्रेशन और नेशनलिटी कानून के तहत एक वीजा है, जिससे अमेरिकी कंपनियों को विशेष रूप से विदेशी कर्मचारियों को अस्थायी तौर पर खास सेगमेंट में नौकरी पर रखने की अनुमति मिलती है। मगर अब एक नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अधिकतर अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियां, जिनमें फेसबुक, गूगल, ऐप्पल और माइक्रोसॉफ्ट शामिल हैं, इस वीजा प्रोग्राम का इस्तेमाल विदेशी कर्मचारियों (Migrant Workers) को मार्केट भाव से कम सैलेरी देने के लिए करती हैं। बता दें कि अमेरिका के इस वीजा नियम के जरिए बड़ी संख्या में भारतीय भी अमेरिका में नौकरी करते हैं।
क्या कहती है रिपोर्ट
इकोनॉमिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार टॉप 30 एच-1 बी एम्प्लोयर्स में जो प्रमुख अमेरिकी कंपनियां हैं उनमें अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, वॉलमार्ट, गूगल, ऐप्पल और फेसबुक शामिल हैं। ये सभी कंपनियां एच-1 बी कार्यक्रम के नियमों का लाभ प्रोग्राम के तहत नौकरी पर रखे गए विदेशी लोगों को स्थानीय माध्य वेतन से कम सैलेरी देकर उठाती हैं। रिपोर्ट कहती है कि अमेरिकी श्रम विभाग (डीओएल) द्वारा प्रमाणित एच-1 बी पदों में से 60 प्रतिशत को स्थानीय स्तर पर मिलने वाले वेतन के मुकाबले अच्छी खासी कम सैलेरी दी जाती है। वैसे तो एच-1 बी प्रोग्राम के नियम इस चीज की अनुमति देते हैं, मगर डीओएल के पास इसे बदलने का अधिकार है, लेकिन इसने ऐसा किया नहीं है।
53000 से अधिक कंपनियों ने अपनाया ये रूट
2019 में 53,000 से अधिक एम्प्लोयर ने एच-1 बी कार्यक्रम का इस्तेमाल किया। 2019 में अमेरिका ने 389,000 लोगों को एच-1 बी वीजा दिया, जिसमें से 25 फीसदी से अधिक को टॉप 30 टेक्नोलॉजी कंपनियों ने जॉब पर रखा। रिपोर्ट आगे कहती है कि टॉप 30 एच-1 बी एम्प्लोयर्स में से आधे थर्ड पार्टी क्लाइंट के लिए स्टाफ प्रदान करने के लिए आउटसोर्सिंग कारोबारी मॉडल का उपयोग करते हैं, बजाय इसके कि एच-1 बी कर्मचारी को कंपनी की विशेष जरूरत को पूरा करने के लिए सीधे नियुक्त करें। अमेरिका में एच-1 बी स्टेटस के साथ लगभग 500,000 प्रवासी लोग नौकरी कर रहे हैं।
सबसे निचले दर्जे की सैलेरी
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बड़ी अमेरिकी तकनीक कंपनियां एच-1 बी के तहत जिन विदेशी कर्मचारियों को सीधे नौकरी पर रखती हैं उनमें से अधिकतर को लेवल-1 और लेवल-2 सर्टिफाइड पद दिए जाते हैं, जो 2019 के सबसे कम सैलेरी वाले स्तर हैं। इन ही दोनों स्तरों पर स्थानीय मीडियन वेतन के मुकाबले बहुत कम सैलेरी दी जाती है। अब तक एच -1 बी नियमों में सुधार के लिए सार्वजनिक चर्चा और प्रस्तावों में से अधिकांश ने उन नियमों पर ध्यान केंद्रित किया है जो इन कंपनियों की आउटसोर्सिंग मॉडल को प्रभावित करेंगे।
कितने लोगों को रखा लेवल 1 और 2 पर
2019 में माइक्रोसॉफ्ट ने एच 1 बी के तहत रखे गए कर्मचारियों में से 35 फीसदी को लेवल-1 और 42 फीसदी को लेवल-2 के तहत नौकरी दी। वहीं अमेजन.कॉम ने 34 फीसदी को लेवल-1 और 51 फीसदी लेवल-2 के तहत नौकरी दी। ऐप्पल, गूगल और फेसबुक ने भी विदेशियों को नौकरी पर इन्हीं स्तरों पर रखा।
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