Deportation News: प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका में रह रहे बाहरी लोगों यानी अवैध प्रवासियों को बाहर निकालने का काम तेजी से कर रहे. चुनावी कैंपेन का हिस्सा रहे इस मुद्दे पर उनके प्रशासन ने सख्ती दिखाई है. इसके लिए उन्होंने सेना को काम पर लगाया है. जबकि आमतौर पर इसकी जिम्मेदारी कस्टम्स एंड इमिग्रेशन एनफ़ोर्समेंट (आईसीई) की होती है. साथ ही अवैध प्रवासियों को कमर्शियल फ्लाइट्स के बजाय सेना के सी-17 ग्लोबमास्टर जैसे बड़े विमानों का इस्तेमाल किया जा रहा. इस कड़ी में करीब 100 भारतीयों को लेकर अमेरिकी सेना का एक विमान अमृतसर पहुंच गया है.
50 लाख रुपए लोन लेकर गया था अमेरिका
अमेरिका से निर्वासित कुल भारतीय प्रवासियों में से 30 लोग पंजाब से हैं. इनमें से एक फतेहगढ़ साहिब जिले के काहनपुरा गांव निवासी जसविंदर सिंह भी हैं. वनइंडिया से बातचीत में जसविंदर सिंह के परिजनों ने बताया कि बेटे को अमेरिका भेजने के लिए 50 लाख रुपए का लोन लिया, जिसपर ब्याज लग रहा है. परिजनों के मुताबिक 15 जनवरी को उनका बेटा अमेरिका पहुंचा था. अब उसे वापस भेज दिया गया.
उन्होंने बताया कि जसविंदर सिंह जीविका की तलाश में अमेरिका गया था, लेकिन नए अमेरिकी कानून की वजह से उसे निर्वासित कर दिया गया. ऐसे में 50 लाख रुपए की भारी रकम की भरपाई करने में बहुत दिक्कत हो रही. जसविंदर सिंह के परिजनों ने सरकार से मदद की गुहार लगाई है. क्योंकि उन्हें अपने बेटे की वापसी में भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. जसविंदर सिंह के पिता जीत सिंह ने मीडिया से बातचीत में बताया कि इता बड़ा लोन भरना बेहद मुश्किल है, क्योंकि उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब है. बड़े बेटे की शादी हो चुकी है और उसकी 2 बेटियां हैं. जसविंदर सिंह के नाम पर केवल 9 कनाल जमीन है.

13 दिन में हो गई वापसी
पंजाब से अमेरिका जाने वालों में एक नाम 40 साल के दविंदरजीत का भी है, जो 13 दिन पहले ही अमेरिका पहुंचा था. उनकी मां ने मीडिया से बातचीत में बताया कि दुबई के रास्ते वह अमेरिका पहुंचा था. जालंभर के रहने वाले दविंजरजीत अमेरिका जाने के लिए 2 महीने पहले घर से निकल गया था. वह पहले दुबई गया और फिर वहां से अमेरिका पहुंचा.
बेहद दर्दनाक रहा 'डंकी' सफर
अवैध रूप से अमेरिका पहुंचने वाले लोगों ने अमेरिका तक पहुंचने के दर्दनाक सफर का भी जिक्र किया. एक यात्री ने बताया कि उनके एजेंट ने यूरोप के वीजे पर भेजा. फिर वहां से जंगलों में पैदल चलाकर और समुद्र के रास्ते मैक्सिको पहुंचाया. आगे 22 जनवरी को मैक्सिको बॉर्डर क्रॉस कर अमेरिका में एंट्री की. लेकिन अब उन्हें वापस भेज दिया गया. पैसेंजर्स ने बताया कि यूरोप से अमेरिका पहुंचने के दौरान खाने पीने का कोई व्यवस्था नहीं था. कभी-कभी ब्रेड पानी से ही काम चलाना पड़ा. कई बार तो भूखे ही सोना पड़ा. इस दौरान कई ने तो रास्ते में ही दम तोड़ दिया.
डोनाल्ड ट्रंप ने अप्रवासियों पर लिया कड़ा एक्शन
डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरी बार अमेरिका के प्रेसिडेंट बने हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति पद की शपथ 20 जनवरी को ली थी, जिसके बाद कई एग्ज़िक्यूटिव ऑर्डर्स पर साइन किए थे. इसमें बॉर्डर की रक्षा के लिए अमेरिकी सेना को अधिकार दिए गए. इसके बाद उन्होंने अवैध प्रवासियों को बाहर निकालने का काम पर तेज कर दिया है. बता दें उनके सत्ता संभालने के बाद से यह अमेरिका में रह रहे भारतीयों का पहला डिपोर्टेशन है. इसके अलावा अमेरिका से ग्वाटेमाला, पेरू, होंडूरास और ब्राजील के लोगों को भी वापस भेजा गया है.


Click it and Unblock the Notifications