
America : अब अमेरिका दिवालिया नहीं होगा। बुधवार को अमेरिका प्रतिनिधि सभा ने ट्रेजरी द्वारा निर्धारित समय सीमा से 5 दिन पहले कर्ज की सीमा को बढ़ाने का बिल को पास कर दिया है। अमेरिका में कर्ज की सीमा को बढ़ाने की लास्ट डेट 5 जून थी।
अगर कर्ज की सीमा को बढ़ाने का बिल पास नहीं होता तो फिर इतिहास में पहली बार अमेरिका दिवालिया हो जाता। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति जो बिडेन और हाउस स्पीकर केविन मैककार्थी के बीच कर्ज की सीमा डील पर बात हुई थी।
अमेरिका के दिवालिया होने के कुछ दिन पहले ही कांग्रेस (संसद) ने भी इस बिल को पास कर दिया है। डेमोक्रेट्स ने इस बिल को 165-46 से सपोर्ट किया। जबकि रिपब्लिकन्स ने इस बिल को 149-71 वोटों से सपोर्ट किया यानी दोनों पार्टी में से अधिकांश सदस्यों ने इस बिल का समर्थन किया है।
अगर हम कर्ज सीमा विवाद की बात करें, तो अमेरिका की सरकार कानूनी रूप से अपने खर्चों और अपने दायित्वों की पूर्ति करने के लिए कर्ज लेती है। अमेरिका की संसद में कर्ज लेने की यह सीमा कानून बनाकर तय की हुई है।
अमेरिकी के संविधान के मुताबिक कांग्रेस को सरकारी खर्च को कंट्रोल करने का अधिकार दिया है। सरकार बिना कांग्रेस के परमिशन के तय सीमा से ज्यादा कर्ज नहीं ले सकती है।
अमेरिका की प्रतिनिधि सभा में विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत है और जो रिपब्लिकन पार्टी के सांसद है वे कर्ज की सीमा को बढ़ाने के पक्ष में नहीं थे। यही कारण था कि यह विवाद बना हुआ था।
अगर कर्ज की सीमा नहीं बढ़ती, तो फिर अमेरिका का खजाना खाली हो सकता था। जिससे अमेरिका में दिवालिया होने का खतरा था। इसका असर सिर्फ अमेरिका में नहीं पड़ता बल्कि इसका असर पूरी दुनिया में पड़ता।
मुकेश अंबानी और गौतम अडानी की संपत्ति भी अमेरिका के नकद भंडार से ज्यादा है। इतना ही नहीं, ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के मुताबिक, विश्व में 31 अरबपतियों के पास अमेरिका के नकद भंडार से ज्यादा संपत्ति है। 25 मई के आकड़े के मुताबिक, अमेरिकी ट्रेजरी के पास सिर्फ 38.8 अरब डॉलर ही नकदी के रूप में बचे थे।


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