नई दिल्ली, अगस्त 01। रोजमर्रा के कामों में कपड़े धोना भी एक अहम काम है। पर ये सबसे मुश्किल कामों में से एक है। यदि किसी घर में वॉशिंग मशीन न हो तो ये और भी मुश्किल हो जाता है। आपको कपड़ों को हाथ से रगड़-रगड़ के साफ करना पड़ता है। पर मशीन हो तो वो एक खर्चीला काम भी है। क्योंकि उसमें पानी, बिजली और डिटर्जेंट का भी उपयोग होता है। इनमें पानी सबसे अहम है। क्योंकि पानी की अहमियत हम सब जानते हैं। पर अब एक नयी मशीन आ गयी है, जो बिना पानी और डिटर्जेंट के चलेगी। आगे जानिए डिटेल।
80 सेकंड में चमकेंगे कपड़े
वॉशिंग मशीन से कपड़े धोने में पानी और डिटर्जेंट काफी खर्च होता है। इस काम में कई लीटर पानी बर्बाद होता है। पर अब ऐसा नहीं होगा। एक स्टार्टअप कंपनी ने एक सॉल्यूशन निकाला है। इससे 80 सेकेंड में आपके गंदे कपड़े चमक जाएंगे। अहम बात यह है कि इसमें न ज्यादा पानी लगेगा और न डिटर्जेंट।
दो अहम दिक्कतों पर दिया ध्यान
जिस कंपनी ने नया सॉल्यूशन ढूंढा है वो है चंडीगढ़ की स्टार्टअप कंपनी 80वॉश। इसने दो बड़ी दिक्कतों पर काम किया है। इनमें ऑटोमेशन और अतिरिक्त पानी का खर्च है। बता दें कि 80 वॉश रुबल गुप्ता, नितिन कुमार सलूजा और वीरेंद्र सिंह द्वारा शुरू किया गया स्टार्टअप है। इन्होंने ही नयी वॉशिंग मशीन तैयार की है, जो 80 सेकेंड में कपड़े धो सकती है।
ज्यादा गंदे हुए तो अधिक समय लगेगा
एक बात का ध्यान रखना जरूरी है कि कपड़ों की सफाई में कितना समय लगेगा ये इस बात पर भी निर्भर करता है कि दाग कितने और कैसे हैं। साथ ही कपड़े किस तरह के हैं। इन चीजों के आधार पर सफाई में अधिक समय लग सकता है। यदि अधिक कपड़े हैं या वे गंदे अधिक हो रहे हैं तो जाहिर है कि उन्हें साफ करने में ज्यादा समय लगेगा।
शानदार है इसकी टेक्नोलॉजी
जिस वॉशिंग मशीन को 80 वॉश ने तैयार किया है वो आईएसपी स्टीम टेक्नोलॉजी के मामले में सबसे अच्छी है। ये कम फ्रीक्वेंसी रेडियो फ्रीक्वेंसी पर दमदार माइक्रोवेव की मदद से बैक्टीरिया को खत्म करती है। इससे आप धातु की वस्तुएं और पीपीई किट को भी साफ कर सकते हैं। पर इसके लिए थोड़ा अधिक पानी लगेगा। आपको इसमें अधिक समय लगेगा।
आधा कप में धुलेंगे इतने कपड़े
इसमें 5 कपड़े धोने में 80 सेकंड लगते हैं। साथ ही इसमें सिर्फ आधा कप पानी ही लगेगा। इस वॉशिंग मशीन के फीचर्स सुन कर आपका मन इसे खरीदने का हो रहा होगा। मगर दिक्कत यह है कि ये मशीन अभी बाजार में नहीं पेश की गयी है। क्योंकि फिलहाल इसे लेकर अभी पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली के कुछ अस्पतालों में इसकी शुरुआत की गयी है। वैसे स्टार्टअप को पंजाब और हरियाणा सरकारों ने मंजूरी दे दी है। संभावना है कि आने वाले समय में इस मशीन को आम लोगों के लिए भी पेश किया जा सकता है। जाहिर है कि इससे पानी, बिजली और डिटर्जेंट की बचत होगी, तो इसकी डिमांड भी अधिक रह सकती है।


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