नई दिल्ली, अगस्त 10। अमेरिका की एक कंपनी का सीईओ अपने कर्मचारियों के साथ बेहतर व्यवहार और उनके अनुकूल नितिया बनाने के लिए इंटरनेट पर छाया हुआ है। सिएटल में ग्रैविटी पेमेंट्स नाम के कंपनी के सीईओ डान प्राइस अपने कर्मचारियों को सालाना न्यूनतम 80,000 डॉलर (यानी 63.5 लाख रुपये) वेतन दे रहे हैं। सैलरी के अलावा डान प्राइस ने अपने कर्मचारियों को कहीं से भी काम करने की अनुमति दी है। यही नहीं कर्मचारी काम करने के घंटे भी अपने से डिसाइड कर सकते हैं। कंपनी के सीईओ ने बतााय की कंपनी पैरेंटल लीव के लिए भी छूट्टी देती है।
लोग कर रहें है अप्लाई
कंपनी में जॉब के लिए अप्लाई करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। लोग कंपनी के काम करने के तरीको और सैलरी की ओर आकर्षित हो रहे हैं। कंपनी के सीईओ प्राइस ने दूसरी कंपनियों से भी फ्लैक्सिबल वर्कऑवर फॉलो करने की सलाह दी है।
कंपनी को भी होता है फायदा
सीईओ प्राइस के ट्वीटर पर 7.71 फॉलोअर्स है, उन्होनें अपने ट्वीटर पर लिखा, "मेरी कंपनी अपने कर्मचारियों को मिनिमम 80 हजार डॉलर वेतन देती है। कंपनी स्टाफ को कहीं से भी काम करने की अनुमती देती है. कंपनी को और कर्चारियों को इस वर्क कल्चर बेनिफिट मिलता है। कर्मचारियों को पैरेंटल लीव आदि की भी सुविधा मिलती है। उन्होनें बताया की कंपनी को हर जॉब के लिए 300 कैंडीडेट्स की एप्लीकेशन मिलती हैं।"
वेतन पर शुरू हुई बहस
कंपनी के सीईओ प्राइस ने कहा कि कोई भी यह नहीं चाहता है कि वो नर्क जैसे माहौल में काम करे। कंपनियां कर्मचारियों को न तो सही सैलरी देती है और न हीं सम्मान। प्राइस ने अपने इंस्टाग्राम पर भी ये पोस्ट डाली है, प्राइस के इस पोस्ट के बाद उचित वेतन पर बहस छीड़ गई है।
2004 में शुरू की थी कंपनी
Inc.com के अनुसार, प्राइस ने 2004 में अपने भाई लुकास प्राइस के साथ मिलकर ग्रेविटी कंपनी की शुरुआत की थी। शुरू में प्राइस भी दूसरे सीईओ की तरह ही थे और अपने कर्मचारियों को औसतन 30,000 डॉलर की सैलरी देते थे। 2011 के अंत में एक एंट्री लेवल के कर्मचारी जेसन हेली ने प्राइस को खरी-खोटी सुना दी थी। हेली ने प्राइस से कहा था, मैं जानता हूं कि आप लोगों के इरादे गलत हैं। आप आर्थिक रूप से बेहद अनुशासित होने का दिखावा कर रहे हैं, लेकिन आपके चलते मैं अच्छा जीवन जीने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं बना पा रहा हूं। कर्मचारी के इस बयान से प्राइस खासे दुखी हुए। उन्होंने सैलरी के मुद्दे पर काफी विचार किया। इसके तीन साल बाद तक प्राइस ने सालाना आधार पर कर्मचारियों के वेतन में 20 फीसदी की बढ़ोतरी की।


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